तूने व्यर्था जन्म गवाया चरखे का भेद ना पाया भजन लिरिक्स | Charkhe Ka Bhed Na Paya Bhajan Lyrics

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तूने व्यर्था जन्म गवाया चरखे का भेद ना पाया भजन लिरिक्स

तूने व्यर्था जन्म गवाया चरखे का भेद ना पाया भजन लिरिक्स, Charkhe Ka Bhed Na Paya Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय।
दो पाठन के बिच में, साबुत बचा ना कोय।


~ चरखे का भेद ना पाया ~

तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।


जद ये चरखा बन के आया ,
खूब खिलाया खूब पिलाया।
उसे सबने ही लाड लड़ाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


यु ही खो दिया बालपण को ,
कभी ने याद किया भगवन को।
तूने हरी का नाम भुलाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


जब चरखे को आयी जवानी ,
बात किसी की एक ना मानी।
थने ऋषियों में भरमाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


जब चरखे को आया बुढ़ापा ,
जब सुजा थने अपना आपा।
तेरी डगमग डोली काया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


जब चरखे में आयी खराबी ,
लगती नाही किसी की चाबी।
जब चार जनो ने उठाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


चुन चुन लकड़ी चिता लगाई ,
रोवे खड़े खड़े बहन भाई।
थने चिता के बिच जलाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,
चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….


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~ Charkhe Ka Bhed Na Paya ~

tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


jad ye charkha ban ke aaya,
khub khilaya khub pilaya.
use sabne hi lad ladaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


yu hi kho diya balpan ko,
kabhi ne yaad kiya bhagwan ko.
tune hari ka naam bhulaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


jab charkhe ko aayi javani,
bat kisi ki ek na mani.
thane rishiyo me bharmaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


jab charkhe ko aya budhapa,
jab suja thane apna apa.
teri dagmag doli kaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


jab charkhe me aayi kharabi,
lagati nahi kisi ki chabi.
jab char jano ne uthaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


chun chun lakadi chita lagai,
rove khade khade bahan bhai.
thane chita ke bich jalaya,
charkhe ka bhed nhi paya.
tune vyartha janam gavaya,
charkhe ka bhed nhi paya.


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~ चरखे का भेद ना पाया ~

तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।

जद ये चरखा बन के आया ,खूब खिलाया खूब पिलाया।
उसे सबने ही लाड लड़ाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

यु ही खो दिया बालपण को ,कभी ने याद किया भगवन को।
तूने हरी का नाम भुलाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

जब चरखे को आयी जवानी ,बात किसी की एक ना मानी।
थने ऋषियों में भरमाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

जब चरखे को आया बुढ़ापा ,जब सुजा थने अपना आपा।
तेरी डगमग डोली काया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

जब चरखे में आयी खराबी ,लगती नाही किसी की चाबी।
जब चार जनो ने उठाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

चुन चुन लकड़ी चिता लगाई ,रोवे खड़े खड़े बहन भाई।
थने चिता के बिच जलाया ,चरखे का भेद नहीं पाया।
तूने व्यर्था जनम गवाया ,चरखे का भेद नहीं पाया। टेर। ….

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भजन :- चरखे का भेद नहीं पाया
गायक :- अनिल नागौरी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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