यह जग दूषित काहे दिठा भजन लिरिक्स | Yah Jag Dushit Kahe Ditha Bhajan Lyrics

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यह जग दूषित काहे दिठा भजन लिरिक्स

यह जग दूषित काहे दिठा भजन लिरिक्स, Yah Jag Dushit Kahe Ditha Desi Nirguni Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये ।
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ।


~ यह जग दूषित काहे दिठा ~

ज्ञान विज्ञानं भेद नहीं जानत ,
माया संग भ्रम चिठा।
यह जग दूषित काहे दिठा।


इक लड़की का ठूंठ खड़ा था ,
प्रेमी ने प्रीतम पीठा।
चोर को चौकीदार पतीजा ,
भ्रम संग भुत प्रगीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….


प्रीतम चौकीदार न भुता ,
था ठूँठा का ठूँठा।
जाग्रत स्वपन सुषुप्ति नाही ,
केवल ब्रह्मा अनूठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….


भ्रम में भेड बना सिंह झूठा ,
में में शब्द संगीठा।
जाग जीव पीव तू तेरा ,
आतम सिंह अदीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….


में तू नाम रूप तज मिथ्या ,
तजो अविद्या झीठा।
सिध्दनाथ सोऽहं अपरोखा ,
मरजीवा रस मीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….


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Desi Nirguni Bhajan Lyrics

~ Yah Jag Dushit Kahe Ditha ~

gyan vigyan bhed nahi janat,
maya sang bhram chitha.
yah jag dushit kahe ditha.


ek ladki ka thunth khada tha,
premi ne preetam pitha.
chor ko chokidar patija,
bhram sang bhut pragitha.
yah jag dushit kahe ditha.


preetam chokidar ne bhuta,
tha thuntha ka thuntha.
jagrat swapan sushupti nahi,
keval brahma anutha.
yah jag dushit kahe ditha.


bhram me bhed bana singh jhutha,
me me shabd sangitha.
jag jeev piv tu tera,
aatam singh aditha.
yah jag dusheet kahe ditha.


me tu naam rup taj mithya,
tajo avidhya jhitha.
sidhdhnath soham aprokha,
marjiva ras mitha.
yah jag dusheet kahe ditha.


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~ यह जग दूषित काहे दिठा ~

ज्ञान विज्ञानं भेद नहीं जानत ,माया संग भ्रम चिठा।
यह जग दूषित काहे दिठा।

इक लड़की का ठूंठ खड़ा था ,प्रेमी ने प्रीतम पीठा।
चोर को चौकीदार पतीजा ,भ्रम संग भुत प्रगीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….

प्रीतम चौकीदार न भुता ,था ठूँठा का ठूँठा।
जाग्रत स्वपन सुषुप्ति नाही ,केवल ब्रह्मा अनूठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….

भ्रम में भेड बना सिंह झूठा ,में में शब्द संगीठा।
जाग जीव पीव तू तेरा ,आतम सिंह अदीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….

में तू नाम रूप तज मिथ्या ,तजो अविद्या झीठा।
सिध्दनाथ सोऽहं अपरोखा ,मरजीवा रस मीठा।
यह जग दूषित काहे दिठा। टेर। ….

भजन :- यह जग दूषित काहे दिठा
लेबल :- राजस्थानी भजन

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