साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा भजन लिरिक्स | Sadhu Bhai Dharu Dhyan Ab Kaisa Bhajan Lyrics

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साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा भजन लिरिक्स

साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा भजन Sadhu Bhai Dharu Dhyan Ab Kaisa Nirguni Para Vani Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये ।
दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ।


~ धरु ध्यान अब कैसा ~

किसको भजु तजु अब किसको ,
मंड्या अचम्भा ऐसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा।


सुन सायर री आशा छूटी ,
चित्त मन भया उदासा।
सूरत नूरत हेर कर हारी ,
थकत भया धर पासा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …


आपा उलट अरु पड़िया आप में ,
क्यों काष्ठ अगन प्रवेशा।
काष्ठ जली अगन भई प्रगट ,
फेर बड़े सोइ वैसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …


निर्गुण माय थकत भया सर्गुण ,
न कोई शेष अशेषा।
ज्यां दुई थकत अविनाशी ,
नित वैसा का वैसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …


एको एक रहया भरपुरा ,
अनुभो भया हुलासा।
कहे बन्नानाथ सुणो भाई साधो ,
कृत अकृत न लेशा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …


जरुरु पढ़े :- क्यों बन रहा तू जीव भिखारी 

जरुरु पढ़े :- साधु भाई निर्भय रूप हमारा

Nirguni Para Vani Bhajan Lyrics

~ Sadhu Bhai Dharu Dhyan Ab Kaisa ~

kisko bhaju taju ab kisko,
mandya achmabha aisa.
sadhu bhai dharu dhyan ab kaisa.


sun sayar ri aasha chuti,
chitt man bhaya udasa.
surat nurat her kar hari,
thakat bhaya dhar pasa.
sadhu bhai dharu dhyan ab kaisa.


aapa ulat aru padiya aap me,
kyu kashth agan pravesha.
kashth jali agan bhai pragat,
fer bade soi vaisa.
sadhu bhai dharu dhyan ab kaisa.


nirgun may thakat bhaya sargun,
n koi sesh ashesha.
jya dui thakat avinashi,
nit vaisa ka vaisa.
sadho bhai dharu dhyan ab kaisa.


aiko ek rahya bharpura,
anubho bhaya hulasa.
kahe bannanath suno bhai sadho,
krit akrit ne lesha.
sadho bhai dharu dhyan ab kaisa.


जरुरु पढ़े :- साधु भाई मेरा देश दीवाना 

जरुरु पढ़े :- मै हूं पूर्ण ब्रह्म अनादि

निर्गुणी भजन परा वाणी भजन लिरिक्स

~ साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा ~

किसको भजु तजु अब किसको ,मंड्या अचम्भा ऐसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा।

सुन सायर री आशा छूटी ,चित्त मन भया उदासा।
सूरत नूरत हेर कर हारी ,थकत भया धर पासा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …

आपा उलट अरु पड़िया आप में ,क्यों काष्ठ अगन प्रवेशा।
काष्ठ जली अगन भई प्रगट ,फेर बड़े सोइ वैसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …

निर्गुण माय थकत भया सर्गुण ,न कोई शेष अशेषा।
ज्यां दुई थकत अविनाशी ,नित वैसा का वैसा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …

एको एक रहया भरपुरा ,अनुभो भया हुलासा।
कहे बन्नानाथ सुणो भाई साधो ,कृत अकृत न लेशा।
साधु भाई धरु ध्यान अब कैसा। टेर। …

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भजन :- धरु ध्यान अब कैसा
गायक :- हस्ता राम जी महाराज
लेबल :- राजस्थानी भजन

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