साधु भाई आनंद रूप में सवाया भजन लिरिक्स | Sadhu Bhai Aanand rup Sawaya Bhajan Lyrics

2010

साधु भाई आनंद रूप में सवाया भजन लिरिक्स

साधु भाई आनंद रूप में सवाया भजन लिरिक्स, Sadhu Bhai Aanand rup Sawaya Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष॥


~ आनंद रूप में सवाया ~

साधु भाई आनंद रूप में सवाया।


में हु सबका जाननहारा ,
मन बुद्धि नहीं पाया।
कथनी करनी से हु में न्यारा ,
निर्भय देश अजाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….


तीन शरीर का में हु दृष्टा ,
सुख दुःख नहीं समाया।
ज्ञान अज्ञान से परे रहता ,
सत चित आनंद थाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….


जागृत स्वपन सुषोपती तुर्या ,
तुर्या का साक्षी रेवाया।
में अखंड आनंद में रहता ,
आपा में आप जनाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….


गणपतराम तो सतगुरुदेवा ,
अटल धाम बसाया।
दिनेशराम तो नेच्छा करिया ,
फेर धरे नहीं काया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….


जरूर देखे :- साधु भाई ऐसा देश हमारा

जरूर देखे :- मैय्या तूने जुलम कर डाला

Desi Nirguni Bhajan Lyrics In Hindi

~ Sadhu Bhai Aanand rup Sawaya ~

Sadhu bhai aanand rup me sawaya.


me hu sabka jaannahara,
man budhdhi nhi paya.
kathani karani se hu me nyara ,
nirbhay desh ajaya.
Sadhu bhai aanand rup me sawaya.


teen sharir ka me hu drishta,
sukh dukh nhi samaya.
gyan agyan se pare rahta,
sat chit aanand thaya.
Sadhu bhai aanand rup me sawaya.


jagrit swapan sushopati turya,
turya ka sakshi revaya.
me akhand aanand me rahta,
aapa me aap janaya.
Sadho bhai aanand rup me sawaya.


ganpatram to satgurudeva,
atal dham basaya.
dineshram to nechcha kariya,
fer dhare nhi kaya.
Sadho bhai aanand rup me sawaya.


जरूर देखे :- साधु भाई परम ब्रह्मा गुरुदेवा

जरूर देखे :- साधु भाई ज्ञान घटा झुक आया

मारवाड़ी निर्गुणी भजन लिरिक्स

~ साधु भाई आनंद रूप में सवाया ~

साधु भाई आनंद रूप में सवाया।

में हु सबका जाननहारा ,मन बुद्धि नहीं पाया।
कथनी करनी से हु में न्यारा ,निर्भय देश अजाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….

तीन शरीर का में हु दृष्टा ,सुख दुःख नहीं समाया।
ज्ञान अज्ञान से परे रहता ,सत चित आनंद थाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….

जागृत स्वपन सुषोपती तुर्या ,तुर्या का साक्षी रेवाया।
में अखंड आनंद में रहता ,आपा में आप जनाया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….

गणपतराम तो सतगुरुदेवा ,अटल धाम बसाया।
दिनेशराम तो नेच्छा करिया ,फेर धरे नहीं काया।
साधु भाई आनंद रूप में सवाया। टेर। ….

निर्गुणी चेतावनी भजन लिरिक्स

भजन :- आनंद रूप में सवाया
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- साधु भाई में मेरो मन समझायो

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