चेतन अखण्ड अपारा भजन लिरिक्स | Chetan Akhand Apara Bhajan Lyrics

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चेतन अखण्ड अपारा भजन लिरिक्स

चेतन अखण्ड अपारा भजन लिरिक्स, Chetan Akhand Apara rajasthani desi nirguni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
सतगुरु को माने नही, अपनी कहै बनाय।
कहै कबीर क्या कीजिये, और मता मन जाय॥


~ चेतन अखण्ड अपारा ~

करके सोध देख उर अंदर ,
चेतन अखण्ड अपारा।
चेतन होय लखे जो चेतन ,
पावे मोक्ष द्वारा।


सामान्य चेतन सभी के अंदर ,
भेद रहित एक सारा।
उनको जान मरे न जन्मे ,
संशय सर्व विडारा।
करके सोध देख उर अंदर ,
चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …


रवि को प्रतिबिम्ब पड़े जल में ,
रूप रवि का धारा।
उदक उपाधि मिटे सब सारी ,
रवि किरण नहीं न्यारा।
करके सोध देख उर अंदर ,
चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …


अस्ति भाति प्रिय परमातम ,
भेद रहित निरधारा।
अचल अभंग अरूप अनामी ,
परशे गुरु का प्यारा।
करके सोध देख उर अंदर ,
चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …


अनुभव नैन विचार चांदणो ,
दर्पण दिल निहारा।
कहे हुक्मेश दरशे निज चेतन ,
लिखे मगन मतवारा।
करके सोध देख उर अंदर ,
चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …


जरूर देखे :- साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो

जरूर देखे :- अवधू ऐसा जोग कमाया

rajasthani desi nirguni bhajan lyrics

~ Chetan Akhand Apara ~

karke sodh dekh ur andar,
chetan akhand apara.
chetan hoy lakhe jo chetan,
pave moksh dwara.


samanye chetan sabhi ke andar,
bhed rahit ek sara.
unko jan mare n janme,
sanshay sarv vidara.
karke sodh dekh ur andar,
chetan akhand apara.


ravi ko pratibimb pade jal me,
rup ravi ka dhara.
udak upadhi mite sab sari,
ravi kiran nhi nayara.
karke sodh dekh ur andar,
chetan akhand apara.


asti bhati priy pramatam,
bhed rahit nirdhara.
achal abhang arup anami,
parshe guru ka pyara.
karke sodh dekh ur andar,
chetan akhand apara.


anubhav nain vichar chandno,
darpan dil nihara.
kahe hukmesh darshe nij chetan,
likhe magan matwara.
karke sodh dekh ur andar,
chetan akhand apara.


जरूर देखे :- साधु भाई सतगुरु सेन बताई

जरूर देखे :- अब हम गुरु गम आतम चिना

निर्गुणी देसी भजन लिरिक्स

~ चेतन अखण्ड अपारा ~

करके सोध देख उर अंदर ,चेतन अखण्ड अपारा।
चेतन होय लखे जो चेतन ,पावे मोक्ष द्वारा।

सामान्य चेतन सभी के अंदर ,भेद रहित एक सारा।
उनको जान मरे न जन्मे ,संशय सर्व विडारा।
करके सोध देख उर अंदर ,चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …

रवि को प्रतिबिम्ब पड़े जल में ,रूप रवि का धारा।
उदक उपाधि मिटे सब सारी ,रवि किरण नहीं न्यारा।
करके सोध देख उर अंदर ,चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …

अस्ति भाति प्रिय परमातम ,भेद रहित निरधारा।
अचल अभंग अरूप अनामी ,परशे गुरु का प्यारा।
करके सोध देख उर अंदर ,चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …

अनुभव नैन विचार चांदणो ,दर्पण दिल निहारा।
कहे हुक्मेश दरशे निज चेतन ,लिखे मगन मतवारा।
करके सोध देख उर अंदर ,चेतन अखण्ड अपारा। टेर। …

भजन :- चेतन अखण्ड अपारा
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- साधु भाई सतगुरु भेद बताया

जरूर देखे :- साधु भाई खेलो गुरु गम ऐड़ो

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