साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो भजन लिरिक्स | Sadhu Bhai Es Vidh Sant Chadhelo Bhajan Lyrics

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साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो भजन लिरिक्स

साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो भजन लिरिक्स, Sadhu Bhai Es Vidh Sant Chadhelo marwadi desi nirguni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान॥


~ इस विध संत चढ़ेलो ~

आसण इडग डिगे नहीं हिले ,
समझ साफ कर गेलो।
साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो।


भूल सुधार वपु कर हल्का ,
मन अरु प्राण मिलेलो।
बहत्तर सेन्स धमक पर आवे ,
बंध उड़ियान लगेलो।
साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..


अर्ध उर्द का आगम मोर्चा ,
सोलह स्वास भरेलो।
कुम्भक बत्तीस ऊपर ठहरावे ,
चौसठ तो उतरेला।
साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..


इन्दु उल्ट भास कर भेला ,
ठोड़ी कण्ठ विच देलो।
जालंधर बंध घोर अनहद की ,
मेरु दण्ड फुटेला।
साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..


महा बंध खेचरी मुद्रा ,
खग मग शब्द गहेलो।
अवघट घाट मारग झक झीणा ,
समझे गुरुमुख चेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..


बेगम बास त्रास नहीं जम की ,
छटो सर्व झमेलों।
कहे प्रताप सुणो भाई साधो ,
निर्भय होय रहेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..


जरूर देखे :- अवधू ऐसा जोग कमाया

जरूर देखे :- आज हमारो मन घूमे वैरागी

marwadi desi nirguni bhajan lyrics

~ Sadhu Bhai Es Vidh Sant Chadhelo ~

aasan edag dige nhi hile,
samajh saf kar gelo.
sadhu bhai es vidh sant chadhelo.


bhul sudhar vapu kar halka ,
man aru pran milelo.
bahttar sens dhamak par aave,
bandh udiyan lagelo.
sadhu bhai es vidh sant chadhelo.


ardh urdh ka aagam morcha,
solah swas bharelo.
kumbhak battis upar thaharave,
chosath to utrela.
sadhu bhai es vidh sant chadhelo.


indu ulat bhas kar bhela,
thodi kanth vich delo.
jalandhar bandh ghor anahad ki,
meru dand fulela.
sadho bhai es vidh sant chadhelo.


maha bandh khechari mudra,
khag mag shabad gahelo.
avghat ghat marag jhak jhina,
samjhe gurumukh chelo.
sadho bhai es vidh sant chadhelo.


begam baas tras nhi jam ki,
chato sarv jhamelo.
kahe pratap suno bhai sadhu,
nirbhay hoy rahelo.
sadho bhai es vidh sant chadhelo.


जरूर देखे :- गाड़ी मारी सीधी अमरापुर जाई

जरूर देखे :- गगन पर मौज हमारी है

पुराने देसी निर्गुणी भजन लिरिक्स

~ साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो ~

आसण इडग डिगे नहीं हिले ,समझ साफ कर गेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो।

भूल सुधार वपु कर हल्का ,मन अरु प्राण मिलेलो।
बहत्तर सेन्स धमक पर आवे ,बंध उड़ियान लगेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..

अर्ध उर्द का आगम मोर्चा ,सोलह स्वास भरेलो।
कुम्भक बत्तीस ऊपर ठहरावे ,चौसठ तो उतरेला।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..

इन्दु उल्ट भास कर भेला ,ठोड़ी कण्ठ विच देलो।
जालंधर बंध घोर अनहद की ,मेरु दण्ड फुटेला।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..

महा बंध खेचरी मुद्रा ,खग मग शब्द गहेलो।
अवघट घाट मारग झक झीणा ,समझे गुरुमुख चेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..

बेगम बास त्रास नहीं जम की ,छटो सर्व झमेलों।
कहे प्रताप सुणो भाई साधो ,निर्भय होय रहेलो।
साधो भाई इस विध सन्त चढ़ेलो। टेर। ..

भजन :- साधु भाई इस विध सन्त चढ़ेलो
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- साधु भाई सतगुरु है दीनदयाला

जरूर देखे :- गुराजी म्हाने सिमरण भेद बतायो 

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