अवधू ऐसा जोग कमाया भजन लिरिक्स | Avadhu Aisa Jog Kamaya Bhajan Lyrics

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अवधू ऐसा जोग कमाया भजन लिरिक्स

अवधू ऐसा जोग कमाया भजन लिरिक्स, Avadhu Aisa Jog Kamaya Desi Chetawani Nirguni Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
मात पिता मिल जायेंगे ,लख चौरासी माय।
गुरु सेवा और बंदगी ,फेर मिलन की नाय।


~ अवधू ऐसा जोग कमाया ~

जाग्रत जोगी जन पाया ,
रे अवधू ऐसा जोग कमाया।


जल की मछलिया अधर जा बैठी ,
अध बिच अण्ड ठहराया।
अण्डा फोड़ एक पक्षी निकला ,
चोंच पंख नहीं काया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …


बिन धरती एक पेड़ देखा ,
फूल नजर नहीं आया।
चोंच बिहूणा चरता देखा ,
अजर अमर फल खाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …


बिना पाल एक सरवर देखा ,
नीर नजर नहीं आया।
जब मेरा मनवा हुआ दीवाना ,
वही बैठकर नहाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …


बसता शहर उजड़ता देखा ,
शून्य में शहर बसाया।
बिन गलियां जोगी फेरी देता ,
अनहद नाद बजाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …


सतगुरु जी की अविचल नगरी ,
शीतल बड़ की छाया।
कहत मछँदर सुण जति गोरख ,
अलख अलख्या जिन पाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …


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Desi Chetawani Nirguni Bhajan Lyrics

~ Avadhu Aisa Jog Kamaya ~

jagrat jogi jan paya,
re avadhu aisa jog kamaya.


jal ki machliya adhar ja baithi,
adh bich und thahraya.
unda fod ek pakshi nikla,
choch pankh nhi kaya.
re avadhu aisa jog kamaya.


bin dharati ek ped dekha,
ful najar nhi aaya.
choch bihuna charta dekha,
ajar amar fal khaya.
re avadhu aisa jog kamaya.


bina pal ek sarvar dekha,
neer najar nhi aaya.
jab mera manva hua diwana,
vahi baithkar nahaya.
re avadhu aisa jog kamaya.


basata shahar ujadta dekha,
shunye me shahar basaya.
bin galiya jogi feri deta,
anahad naad bajaya.
re avdhu aisa jog kamaya.


satguru ji ki avichal nagari,
shital bad ki chaya.
kahat machandar sun jati gorakh,
alakh alakhya jin paya.
re avdhu aisa jog kamaya.


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~ अवधू ऐसा जोग कमाया ~

जाग्रत जोगी जन पाया ,रे अवधू ऐसा जोग कमाया।

जल की मछलिया अधर जा बैठी ,अध बिच अण्ड ठहराया।
अण्डा फोड़ एक पक्षी निकला ,चोंच पंख नहीं काया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …

बिन धरती एक पेड़ देखा ,फूल नजर नहीं आया।
चोंच बिहूणा चरता देखा ,अजर अमर फल खाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …

बिना पाल एक सरवर देखा ,नीर नजर नहीं आया।
जब मेरा मनवा हुआ दीवाना ,वही बैठकर नहाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …

बसता शहर उजड़ता देखा ,शून्य में शहर बसाया।
बिन गलियां जोगी फेरी देता ,अनहद नाद बजाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …

सतगुरु जी की अविचल नगरी ,शीतल बड़ की छाया।
कहत मछँदर सुण जति गोरख ,अलख अलख्या जिन पाया।
रे अवधू ऐसा जोग कमाया। टेर। …

Heera Ram Sen Ke Bhajan

भजन :- अवधू ऐसा जोग कमाया
गायक :- हीराराम जी सेन
लेबल :- राजस्थानी भजन

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