अब हम सत्संग की गम जानी भजन लिरिक्स | Ab Ham Satsang Ki Gam Jani Bhajan Lyrics

482

अब हम सत्संग की गम जानी भजन लिरिक्स

अब हम सत्संग की गम जानी भजन लिरिक्स, Ab Ham Satsang Ki Gam Jani satguru nirguni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान॥


~ सतसंग की गम जाणी ~

कर सतसंग रहे गुरु शरणा ,
पद पावे निर्वाणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी।


सतगुरु मेहर करी मुझ ऊपर ,
दिनी सैन सैनाणी।
कर दर्शन परसन भई सुरता ,
घट में गंग बहानी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..


सतगुरु बाण शब्द का मारया ,
घायल होय गिराणी।
उडी म्हारी नींद स्वपन सु जाग्यो ,
गाढ़ी नींद नसानी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..


तनमन तीन अवस्था गुण में ,
भ्रम से जीव भुलाणी।
इसके परे है बास हमारा ,
ज्ञानी साध पिछाणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..


सिद्धनाथ मिल्या गुरु पूरा ,
मिट गई खीचातानी।
कहे सुखदेव मेहर सतसंग की ,
अमर जागीरी माणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..


जरूर देखे :- भक्ति को बाग़ लगाओ

जरूर देखे :- साधु भाई सत्संग बाग लगाया

satguru nirguni bhajan lyrics

~ Ab Ham Satsang Ki Gam Jani ~

kar satsang rahe guru sharna,
pad pave nirvani.
ab ham satsang ki gam jani.


satguru mehar kari mujh upar,
dini sain sainani.
kar darshan parsan bhai surta,
ghat me gang bahani.
ab ham satsang ki gam jani.


satguru ban shabad ka marya,
ghayal hoy girani.
udi mhari nind swapn su jagyo,
gadhi nind nasani.
ab ham satsang ki gam jani.


tanman teen avastha gun me,
bhram se jeev bhulani.
iske pare hai baas hamara,
gyani sadh pichani.
ab hum satsang ki gam jani.


sidhdhnath miliya guru pura,
mit gai khichtani.
kahe sukhdev mehar satsang ki,
amar jagiri mani.
ab hum satsang ki gam jani.


जरूर देखे :- साधु भाई सतसंग अमृत धारा

जरूर देखे :- साधो भाई सतसंग मोक्ष द्वारा

सतगुरु महिमा निर्गुणी भजन लिरिक्स

~ अब हम सत्संग की गम जानी ~

कर सतसंग रहे गुरु शरणा ,पद पावे निर्वाणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी।

सतगुरु मेहर करी मुझ ऊपर ,दिनी सैन सैनाणी।
कर दर्शन परसन भई सुरता ,घट में गंग बहानी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..

सतगुरु बाण शब्द का मारया ,घायल होय गिराणी।
उडी म्हारी नींद स्वपन सु जाग्यो ,गाढ़ी नींद नसानी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..

तनमन तीन अवस्था गुण में ,भ्रम से जीव भुलाणी।
इसके परे है बास हमारा ,ज्ञानी साध पिछाणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..

सिद्धनाथ मिल्या गुरु पूरा ,मिट गई खीचतानी।
कहे सुखदेव मेहर सतसंग की ,अमर जागीरी माणी।
अब हम सतसंग की गम जाणी। टेर। ..

भजन :- सतसंग की गम जाणी
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- काई थारे पग मे काटो भागियो

जरूर देखे :- आजा तेजल आजा

पिछला लेखभक्ति को बाग़ लगाओ भजन लिरिक्स | Bhakti Ko Baag Lagaao Bhajan Lyrics
अगला लेखभक्ति भगवत ने है प्यारी भजन लिरिक्स | Bhakti Bhagwat Ne Hai Pyari Bhajan Lyrics

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

5 × 5 =