हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा भजन लिरिक्स | Harji Ji Mhari Sun Lijo Abhilasha Bhajan Lyrics

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हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा भजन लिरिक्स

हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा भजन लिरिक्स, Harji Ji Mhari Sun Lijo Abhilasha Satguru Mahima Bhajan Lyrics

।। दोहा ।।
गुरु आज्ञा मानै नहीं, चलै अटपटी चाल।
लोक वेद दोनों गए, आए सिर पर काल॥


~ सुण लीजो अभिलाषा ~

भक्ति दान ज्ञान दे दाता ,
घट उर में उजियासा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा।


मल विक्षेप आवरण है तीनू ,
दुःख देवे है कासा।
पाप अज्ञान चंचलता देखो ,
याने करो अब नाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …


तीन गुणों का बंधन भारी ,
मोहे देवे त्रासा।
सत्तोगुण रा प्रकाश करो ,
अब रजतम कर नाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …


मोह माया काया कर लेवे ,
घायल कर दियो कासा।
काम क्रोध दोनो दुःख दायक ,
सतबुद्धि करे विनाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …


आप बिना म्हारे सहायक नहीं ,
फिर देख्यो जन कासा।
सूक्ष्म शत्रु ने नाश करो ,
अब जब आवे विश्वासा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …


हु दुखिया दुखियन की सुनलो नाथ ,
अनाथ की त्रासा।
देवा अरज सुणो अब जल्दी ,
सुख का देवो दिलाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …


जरूर देखे :- मन रे गुरु वचना में रहणा

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Satguru Mahima Bhajan Lyrics hindi

~ Harji Ji Mhari Sun Lijo Abhilasha ~

Bhakti Dan gyan de data,
ghat ur me ujiyara.
Hariji Mhari Sun LIjo Abhilasha.


mal vikshep aavaran hai teenu,
dukh deve hai kasa.
pap agayn chanchala dekho,
yane karo ab nasha.
Hariji Mhari Sun LIjo Abhilasha.


teen guno ka bandhan bhari,
mohe deve trasa.
sattogun ra prakash karo,
ab rajtam kar nasha.
Hariji Mhari Sun LIjo Abhilasha.


moh maya kaya kar leve,
ghayal kar diyo kasa.
kam krodh dono dukh dayak,
satabudhdhi kare vinasha.
Hariji Mhari Sun LIjo Abhilasha.


aap bina mhare sahayak nhi,
fir dekhyo jan kasa.
suksh shatru ne nash karo,
ab jab aave vishvasha.
Hariji Mhari Sun LIjo Abhilasha.


hu dukhiya dukhiyan ki sunlo nath,
anath ki trasa.
dev araj suno ab jaldi,
sukh ka devo dilasha.
hariji mhari sun lijo abhilasha.


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~ हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा ~

भक्ति दान ज्ञान दे दाता ,घट उर में उजियासा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा।

मल विक्षेप आवरण है तीनू ,दुःख देवे है कासा।
पाप अज्ञान चंचलता देखो ,याने करो अब नाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …

तीन गुणों का बंधन भारी ,मोहे देवे त्रासा।
सत्तोगुण रा प्रकाश करो ,अब रजतम कर नाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …

मोह माया काया कर लेवे ,घायल कर दियो कासा।
काम क्रोध दोनो दुःख दायक ,सतबुद्धि करे विनाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …

आप बिना म्हारे सहायक नहीं ,फिर देख्यो जन कासा।
सूक्ष्म शत्रु ने नाश करो ,अब जब आवे विश्वासा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …

हु दुखिया दुखियन की सुनलो नाथ ,अनाथ की त्रासा।
देवा अरज सुणो अब जल्दी ,सुख का देवो दिलाशा।
हरिजी म्हारी सुण लीजो अभिलाषा। टेर। …

भजन :- सुण लीजो अभिलाषा
लेबल :- राजस्थानी भजन

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