जाए वन में हरी ने कुटिया बनाई भजन लिरिक्स | Jaay Ban Me Hari Ne Kutiya Banai Bhajan Lyrics

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जाए वन में हरी ने कुटिया बनाई भजन लिरिक्स

जाए वन में हरी ने कुटिया बनाई भजन लिरिक्स, Jaay Ban Me Hari Ne Kutiya Banai Bhajan Lyrics

~ हरी ने कुटिया बनाई ~

जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई।


भोज पत्र की बनी कुटिया ,
चन्दन बली लगाई।
सीता सतवंती बाग़ लगायो ,
सोहन मिरगो भाई चर चर जाई।
जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….


राम लक्मण दोऊ मिलकर बैठा ,
सीता बात सुनाई।
सोहन मिरगो बागा हळियो ,
इन रे मिरग री खाल म्हारे मन भाई।
जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….


इतनी बात सुनी रघुवर ने ,
धनुष बाण रे उठाई।
में जाऊ मिरगा रे लारे ,
चौकस रहना मेरे लक्मण भाई।
जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….


दूर जय हरी मिरग मारियो ,
हाहाकार मचाई।
मरतो मिरगो यु बोलियों ,
सुध बुध लेना मेरी लक्मण भाई।
जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….


मिरग मार हरी पंचवटी आए ,
सुनी कुटिया पाई।
तुलसीदास आस रघुवर री ,
सिया को बता दो मेरा लक्मण भाई।
जाय वन में ,
हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….


जरूर देखे :- जागो रे बस्ती रा लोगो

जरूर देखे :- जागो रे म्हारा छैल छोगाला

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~ Jaay Ban Me Hari Ne Kutiya Banai ~

jay van me,
hari ne kutiya banai.


bhoj patr ki bani kutiya,
chandan bali lagai.
sita satvanti bag lagayo,
sohan mirgo bhai char char jai.
jay van me,
hari ne kutiya banai.


ram laxman dou milkar baitha,
sita bat sunai.
sohan mirago baga haliyo,
in re mirag ri khal mhare man bhai.
jay van me,
hari ne kutiya banai.


itani bat suni raghuvar ne,
dhanush ban re uthai.
me jau miraga re lare,
chokas rahna mere laxman bhai.
jay van me,
hari ne kutiya banai.


dur jay hari mirag mariyo,
hahakar machai.
marto mirgo yu boliyo,
sudh budh lena meri laxman bhai.
jay van me,
hari ne kutiya banai.


mirag mar hari panchvati aai,
suni kutiya pai.
tulsidas aas raghuvar ri,
siya ko bata do mera laxman bhai.
jay van me,
hari ne kutiya banai.


जरूर देखे :- मात यशोदा टेर लगावे

जरूर देखे :- पायो जी मेने राम रतन धन पायो

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~ जाए वन में हरी ने कुटिया बनाई ~

जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई।

भोज पत्र की बनी कुटिया ,चन्दन बली लगाई।
सीता सतवंती बाग़ लगायो ,सोहन मिरगो भाई चर चर जाई।
जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….

राम लक्मण दोऊ मिलकर बैठा ,सीता बात सुनाई।
सोहन मिरगो बागा हळियो ,इन रे मिरग री खाल म्हारे मन भाई।
जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….

इतनी बात सुनी रघुवर ने ,धनुष बाण रे उठाई।
में जाऊ मिरगा रे लारे ,चौकस रहना मेरे लक्मण भाई।
जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….

दूर जय हरी मिरग मारियो ,हाहाकार मचाई।
मारतो मिरगो यु बोलियों ,सुध बुध लेना मेरी लक्मण भाई।
जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….

मिरग मार हरी पंचवटी आए ,सुनी कुटिया पाई।
तुलसीदास आस रघुवर री ,सिया को बता दो मेरा लक्मण भाई।
जाय वन में ,हरी ने कुटिया बनाई। टेर। ….

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भजन :- हरी ने कुटिया बनाई
गायक :- मोहन झाला
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- देखो री एक बाला जोगी

जरूर देखे :- जागो मोहन प्यारे रे 

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