विष्णु से जाकर यम ने यही पुकारा भजन लिरिक्स | Vishnu Se Jake Yam Ne Yahi Pukara Bhajan Lyrics

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विष्णु से जाकर यम ने यही पुकारा भजन लिरिक्स

विष्णु से जाकर यम ने यही पुकारा भजन लिरिक्स, Vishnu Se Jake Yam Ne Yahi Pukara ganga maiya ke bhajan lyrics

।। दोहा ।।
सुता सुता क्या क्या करो, सुता ने आवे नींद।
जम सिराणे यु खड़ो, ज्यू तोरण आयो बिंद।


~ विष्णु से जाके यम ने यही पुकारा ~

विष्णु से जाके ,
यम ने यही पुकारा।
गंगा ने बंद कर दिया ,
नरक का द्वारा।


लाखो पापी पृथ्वी पे रोज मरते है ,
क्या कहु में उनको क्षण भर में तिरते है।
वो मेरे भय से जरा नहीं डरते है ,
गंगा के गण उनकी रक्षा करते है।
बिन भजन किये उनका होता निस्तारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


जब मेरे दूत पापो को जाय पकड़ने ,
गंगा के गण आते है उनसे लड़ने।
वो देख देख दूतो से लगे अकड़ने ,
और मारे बाण लगते है तन बिच गड़ने।
लड़ लड़कर के में लाख लड़ाई हारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


गंगा के सो योजन पर एक नगर था ,
उस नगरी में ऊँचा एक पापी का घर था।
वह पाप करम को करता रोज गुजरता ,
मर गया तो पड़ा उस पर एक वस्त्र था।
गंगा का धोया उसी ने उसको तारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


चाहे हिन्दू मुस्लिम होवे डुम कसाई ,
चाहे भंगी धोबी हठफोड़ा और नाई।
गंगा की लहर जो दूर से दी दिखलाई ,
फिर अंत समय में उसने मुक्ति पाई।
दर्शन करते ही तीरा महा हत्यारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


यह बात सुनी विष्णु जी उनसे बोले ,
गंगा की महिमा का लख मुख से खोले।
इस नेत्र से गंगा का दर्शन जो कर ले ,
वो वैकुण्ठो में सदा हिंडोला झूले।
कुछ बस नहीं चलता मेरा और तुम्हारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


जब मृत्युलोक में गंगा आप सिधरिए ,
तब वह पापी फिर कौन विधि से तरिए।
इस कलयुग में कोई पाप कर्म कर मरिए ,
वो आन आन कर नरक तुम्हारा भरिए।
यमराजा जी अब थोड़ा करो गुजारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


जब बात सुनी यमराजा घर को आए ,
कुछ हँसे और मन ही मन मुस्काए।
मन मार के फिर गंगा को वचन सुनाए ,
अब तो तुम्हारे थोड़े ही दिन रह पाए।
कहे बनारसी अब याम का चला न चारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …


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ganga maiya ke bhajan lyrics

~ Vishnu Se Jake Yam Ne Yahi Pukara ~

vishnu se jake yam ne yahi pukara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


lakho papi prithvi pe roj marate hai,
kya kahu me unko kshan bhar me tirate hai.
vo mere bhay se jara nhi darte hai,
ganga ke gan unko raksha karte hai.
bin bhajan kiye unka hota nistara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


jab mere dut papo ko jay pakadane,
ganga ke gan aate hai unse ladne.
vo dekh dekh duto se lage akadane,
or maare ban lagate hai tan bich gadne.
lad ladkar ke me lakh ladai hara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


ganga ke so yojan par ek nagar tha,
us nagari me uncha ek papi ka ghar tha.
vah pap karam ko karta roj gujrata,
mar gaya to pada us par ek vastra tha.
ganga ka dhoya usi ne usko tara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


chahe hindu muslim hove dum kasai ,
chahe bhangi dhobi hathfoada or nai.
ganga ki lahar jo dur se di dikhlai,
fir ant samay me usne mukti pai.
darshan karte hi teera maha hatyara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


yah bat suni vishnu ji unse bole,
ganga ki mahima ka lakh mukh se khole,
is netra se ganga ka darsahn jo kar le,
vo vaikuntho me sada hindola jhule.
kuch bas nhi chalta mera or tumhara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


jab mrityulok me ganga aap sidhariye,
tab vah papi fir kon vidhi se tariye.
es kalyug me koi pap karm kar mariye,
vo aan aan kar narak tumhara bhariye.
yamraja ji ab thoda karo gujara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


jab bat suni yamraja ghar ko aaye,
kuch hanse or man hi man muskaye,
man maar ke fir ganga ko vachan sunaye,
ab to tumhare thode hi din rah pay.
kahe banarsi ab yaam ka chala ne chara,
ganga ne band kar diya narak ka dwara.


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गंगा मैया के भजन लिरिक्स

~ विष्णु से जाकर यम ने यही पुकारा ~

विष्णु से जाके ,यम ने यही पुकारा।
गंगा ने बंद कर दिया ,नरक का द्वारा।

लाखो पापी पृथ्वी पे रोज मरते है ,
क्या कहु में उनको क्षण भर में तिरते है।
वो मेरे भय से जरा नहीं डरते है ,
गंगा के गण उनकी रक्षा करते है।
बिन भजन किये उनका होता निस्तारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

जब मेरे दूत पापो को जाय पकड़ने ,
गंगा के गण आते है उनसे लड़ने।
वो देख देख दूतो से लगे अकड़ने ,
और मारे बाण लगते है तन बिच गड़ने।
लड़ लड़कर के में लाख लड़ाई हारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

गंगा के सो योजन पर एक नगर था ,
उस नगरी में ऊँचा एक पापी का घर था।
वह पाप करम को करता रोज गुजरता ,
मर गया तो पड़ा उस पर एक वस्त्र था।
गंगा का धोया उसी ने उसको तारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

चाहे हिन्दू मुस्लिम होव डुम कसाई ,
चाहे भंगी धोबी हठफोड़ा और नाई।
गंगा की लहर जो दूर से दी दिखलाई ,
फिर अंत समय में उसने मुक्ति पाई।
दर्शन करते ही तीरा महा हत्यारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

यह बात सुनी विष्णु जी उनसे बोले ,
गंगा की महिमा का लख मुख से खोले।
इस नेत्र से गंगा का दर्शन जो कर ले ,
वो वैकुण्ठो में सदा हिंडोला झूले।
कुछ बस नहीं चलता मेरा और तुम्हारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

जब मृत्युलोक में गंगा आप सिधरिए ,
तब वह पापी फिर कौन विधि से तरिए।
इस कलयुग में कोई पाप कर्म कर मरिए ,
वो आन आन कर नरक तुम्हारा भरिए।
यमराजा जी अब थोड़ा करो गुजारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

जब बात सुनी यमराजा घर को आए ,
कुछ हँसे और मन ही मन मुस्काए।
मन मार के फिर गंगा को वचन सुनाए ,
अब तो तुम्हारे थोड़े ही दिन रह पाए।
कहे बनारसी अब याम का चला न चारा ,
गंगा ने बंद कर दिया नरक का द्वारा। टेर। …

मोइनुद्दीन मनचला के भजन

भजन :- विष्णु से जाके यम ने यही पुकारा
गायक :- मोइनुद्दीन मनचला
लेबल :- राजस्थानी भजन

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