साधु भाई ! परखो सबद टकसारा भजन लिरिक्स | Parakho Sabad Taksara Bhajan lyrics

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साधु भाई ! परखो सबद टकसारा भजन लिरिक्स

साधु भाई ! परखो सबद टकसारा भजन लिरिक्स, Parakho Sabad Taksara chetawani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
राम राम सब कहे, कुल अपने की रीत।
जब लख राम परख्यो नहीं, तब लख आडी भीत


~ परखो सबद टकसारा ~

परख्या बिना परतीत नहीं होवे ,
कैसे होवे निस्तारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


इण जगत में जाल फेलियो ,
ना कोई वार न पारा।
तीन लोक दशो दिशा में ,
हो गया धधुकारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


इण जाल से सब जग बांधा ,
सिध्द साधक वोपारा।
ओ जाल तो ऐसो झीणो ,
दिसत नहीं लिगारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


इण जाल री उल्टी आटी ,
छुटत नहीं लिगारा।
जो कोई हरी जन आटी खोले ,
और पड़े दोय च्यारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


है कोई ऐसा संत सुरमा ,
रेवे जाल से न्यारा।
उल्टो जाल पड़े जगत में ,
करे तमाशा सारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


पीवो प्याला होवो मतवाला ,
दर से आरम पारा।
कहे हेमनाथ सुणो भाई साधो ,
भेट लिया दीदारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….


जरूर देखे :- रे संतो ! अमी रस क्यों नहीं चखता

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chetawani bhajan lyrics in hindi

~ Parakho Sabad Taksara ~

parkhya bina partit nhi hove,
kaise hove nistara.
sadhu bhai ! parkho sabad taksara.


in jagat me jal feliyo,
na koi var ne para.
teen lok dasho disha me,
ho gaya dhadhukara.
sadhu bhai ! parkho sabad taksara.


in jal se sab jag bandha,
sidhdh sadhak vopara.
o jal to aiso jhino,
disat nhi ligara.
sadhu bhai ! parkho sabad taksara.


in jal ri ulti aati,
chutat nhi ligara.
jo koi hari jan aati khole,
or pade doy chyara.
sadhu bhai ! parkho sabad taksara.


hai koi aisa sant surma,
reve jal se nyara.
ulto jal pade jagat me,
kare tamasha sara.
sadhu bhai ! parkho sabad taksara.


pivo pyala hovo matwala,
dar se aaram para.
kahe hemnath suno bhai sadho,
bhet liya didara.


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~ साधु भाई ! परखो सबद टकसारा ~

परख्या बिना परतीत नहीं होवे ,कैसे होवे निस्तारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

इण जगत में जाल फेलियो ,ना कोई वार न पारा।
तीन लोक दशो दिशा में ,हो गया धधुकारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

इण जाल से सब जग बांधा ,सिध्द साधक वोपारा।
ओ जाल तो ऐसो झीणो ,दिसत नहीं लिगारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

इण जाल री उल्टी आटी ,छुटत नहीं लिगारा।
जो कोई हरी जन आटी खोले ,और पड़े दोय च्यारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

है कोई ऐसा संत सुरमा ,रेवे जाल से न्यारा।
उल्टो जाल पड़े जगत में ,करे तमाशा सारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

पीवो प्याला होवो मतवाला ,दर से आरम पारा।
कहे हेमनाथ सुणो भाई साधो ,भेट लिया दीदारा।
साधु भाई ! परखो सबद टकसारा। टेर। ….

jog bharti ke bhajan

भजन :- साधु भाई परखो सबद टकसारा
गायक :- जोग भारती
लेबल :- राजस्थानी भजन

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