संतो ! अमरलोक कुण जासी भजन लिरिक्स | santo ! Amar Lok Kun Jasi Bhajan Lyrics

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संतो ! अमरलोक कुण जासी भजन लिरिक्स

संतो ! अमरलोक कुण जासी भजन लिरिक्स, santo ! Amar Lok Kun Jasi chetawani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
मिलन भला बिछडन बुरा, मिल बिछडो मत कोय।
फेर हस मिठो बोलणो, हरी करे कद होय।


~ अमरलोक कुण जासी ~

पांच तत्व री बणी कोठड़ी ,
आ तो बिखर जासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


कुण है ठाकर कुण है चाकर ,
कुण है आगे दासी।
कौन पुरष री फिरे दुहाई ,
कौन नगर रो वासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


मन है ठाकर तन है चाकर ,
दस इन्द्रिया दासी।
अविनाशी री फिरे दुहाई ,
हंस नगरिया रो वासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


कुण है गुरु कुण है चेला ,
कुण पुरुष अविनाशी।
कहो हंसा तुम किसे कहत हो ,
बात बतावो साँची।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


सबद गुरु ने सूरत चेला ,
अमर पुरुष अविनाशी।
हंसा उलट सोऽहं होत है ,
पार ब्रह्मा प्रकाशी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


गुरु जोरावर पूरा मिलिया ,
बात बताई म्हाने साँची।
हेमनाथ सतगुरु जी शरणे ,
संत अमरापुर जासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….


जरूर देखे :- साधु भाई ! मेरा भेद में पाया

जरूर देखे :- संतो ! गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी 

chetawani bhajan lyrics in hindi

~ santo ! Amar Lok Kun Jasi ~

panch tatv ri bani kothdi,
aa to bikhar jasi.
santo ! Amar Lok Kun Jasi.


koun he thakar kun he chakar,
kun hai aage dasi.
kun purush ri fire duhai,
kon nagar ri vasi.
santo ! amar lok kun jasi.


man hai thakar tan hai chakar,
das indriya dasi.
avinashi ri fire duhai,
hans nagariya ro vasi.
santo ! amarlok kun jasi.


kun hai guru kun hai chela,
kun purush avinashi.
kaho hansa tum kise kahat ho,
bat batavo sanchi.
santo ! amarlok kun jasi.


sabad guru ne surat chela,
amar purush avinashi.
hansa ulat soham hot hai,
par brahma prakashi.
santo ! amarlok kun jasi.


guru joravar pura miliya,
bat batai mhane sanchi.
hemanath satguru ji sharne,
sant amrapur jasi .
santo ! AmarLok Kun Jasi .


जरूर देखे :- संतो किन री फेरो माला

जरूर देखे :- साधु भाई जोगी बण ने आया

मारवाड़ी चेतावनी भजन लिरिक्स

~ संतो ! अमरलोक कुण जासी ~

पांच तत्व री बणी कोठड़ी ,आ तो बिखर जासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

कुण है ठाकर कुण है चाकर ,कुण है आगे दासी।
कौन पुरष री फिरे दुहाई ,कौन नगर रो वासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

मन है ठाकर तन है चाकर ,दस इन्द्रिया दासी।
अविनाशी री फिरे दुहाई ,हंस नगरिया रो वासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

कुण है गुरु कुण है चेला ,कुण पुरुष अविनाशी।
कहो हंसा तुम किसे कहत हो ,बात बतावो साँची।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

सबद गुरु ने सूरत चेला ,अमर पुरुष अविनाशी।
हंसा उलट सोऽहं होत है ,पार ब्रह्मा प्रकाशी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

गुरु जोरावर पूरा मिलिया ,बात बताई म्हाने साँची।
हेमनाथ सतगुरु जी शरणे ,संत अमरापुर जासी।
संतो ! अमरलोक कुण जासी। टेर। ….

geeta swami ke bhajan

भजन :- अमरलोक कुण जासी
गायिका :- गीता गोस्वामी
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- मन रे ! अंत गरब मत कीजे

जरूर देखे :- रे संतो जोगी जुग से न्यारा

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