संतो किन री फेरो माला भजन लिरिक्स | Santo Kin Ri Fero Mala Bhajan Lyrics

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संतो किन री फेरो माला भजन लिरिक्स

संतो किन री फेरो माला भजन लिरिक्स Santo Kin Ri Fero Mala chetawani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
कबीरा खड़ा बाजार में, सब की मांगे खेर।
ना कहु से दोस्ती, ना कहु से बेर ।


~ संतो किन री फेरो माला ~

रंग नहीं रूप सांसा नहीं उनके ,
नहीं जवान नहीं बाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …


माता पिता दोनों नहीं,
नहीं सुसरा नहीं साला।
भाई बंधू ज्यां रे तिरिया नहीं ,
राम रेहता रखवाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …


धरा गगन दोनों नहीं है ,
चंदा सूरज से न्यारा।
खण्ड रे मण्डल दोनों नहीं ,
आठो पहर उजाला।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …


सात समुन्द्र परवत नहीं है ,
नहीं कोई नवलख तारा।
अठारे करोड़ वनराय नहीं है ,
नहीं कोई पंछी पाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …


अगम सु आगे अलौकिक नगरी ,
कला मुकाम नहीं ताळा।
शीतलनाथ री ऐसी विनती ,
अपना ही देश संभाला।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …


जरूर देखे :- साधु भाई ! जग सपना वाली बाजी

जरूर देखे :- रे संतो ! काल पकड़ ले जाई

chetawani bhajan lyrics in hindi

~ Santo Kin Ri Fero Mala ~

rang nhi rup sansa nhi unke,
nhi javan nhi bala.
o santo bhai ! kin ri fero mala …….


mata pita dono nhi,
nhi susra nhi sala.
bhai bandhu jya re tiriya nhi,
ram rehta rakhwala.
o santo bhai ! kin ri fero mala …….


dhara gagan dono nhi hai,
chanda suraj se nyara.
khand re mandal dono nhi,
aatho pahar ujala.
o santo bhai ! kin ri fero mala …….


sant samundr parvat nhi hai,
nhi koi navlakh tara.
athare karod vanray nhi hai,
nhi koi panchi pala.
o santo bhai ! kin ri fero mala …….


agam su aage alokik nagar,
kala mukam nhi tala.
shitalnath ri aisi vinti,
apna hi desh sanbhala.
o santo bhai ! kin ri fero mala …….


जरूर देखे :- साधु भाई जोगी बण ने आया

जरूर देखे :- मन रे ! अंत गरब मत कीजे

चेतावनी भजन लिरिक्स इन हिंदी

~ संतो किन री फेरो माला ~

रंग नहीं रूप सांसा नहीं उनके ,नहीं जवान नहीं बाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …

माता पिता दोनों नहीं, नहीं सुसरा नहीं साला।
भाई बंधू ज्यां रे तिरिया नहीं ,राम रेहता रखवाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …

धरा गगन दोनों नहीं है ,चंदा सूरज से न्यारा।
खण्ड रे मण्डल दोनों नहीं ,आठो पहर उजाला।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …

सात समुन्द्र परवत नहीं है ,नहीं कोई नवलख तारा।
अठारे करोड़ वनराय नहीं है ,नहीं कोई पंछी पाळा।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …

अगम सु आगे अलौकिक नगरी ,कला मुकाम नहीं ताळा।
शीतलनाथ री ऐसी विनती ,अपना ही देश संभाला।
ओ संतो भाई ! किण री फेरो माला। टेर। …

jog bharti ke bhajan

भजन :- किन री फेरो माला
गायक :- जोग भारती
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- रे संतो जोगी जुग से न्यारा

जरूर देखे :- रे संतो ! केहणा सुण ले मेरा

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