मन रे ! अंत गरब मत कीजे भजन लिरिक्स | Man Re Ant Garab Mat Kije Bhajan Lyrics

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मन रे ! अंत गरब मत कीजे भजन लिरिक्स

मन रे ! अंत गरब मत कीजे भजन लिरिक्स, Man Re Ant Garab Mat Kije Bhajan Lyrics rajasthani nirguni bhajan

।। दोहा ।।
चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय।
दो पठान के बिच में, साबुत बचा ना कोय।


~ अंत गरब मत कीजे ~

आया ने आदर दीजे ,
नमस्कार निव कीजे।
इण बातो सु सायब राजी ,
आछा गुण धारिजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। …


दया भाव राखिजे ,
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….


वैर बुराई ए छोड़ ईर्ष्या ,
सत संगत नित कीजे।
ईश्वर सब घट विराजे ,
ए बाता लख लीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….


गुण रो हीण होवे जुग माहि ,
उण से जग नहीं धीजे।
गुण सागर धारण कर लेवे ,
दरश किया दुःख सीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….


मात पिता री सेवा कीजे ,
जग में आप सरीजे।
पावो लोक परलोक भलाई,
वैकुण्ठा में वास वसीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….


आठो पहर हरि गुण गावो ,
हरि चरण चित दीजे।
दास दोल री आ है विनती ,
तार विलम्ब मत कीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….


जरूर देखे :- रे संतो जोगी जुग से न्यारा

जरूर देखे :- लीलन प्यारी

rajasthani nirguni bhajan lyrics

~ Man Re Ant Garab Mat Kije ~

aaya ne aadar dije,
namaskar niv kije.
in bato su sayab raji,
aacha gun dharije.
man re ! ant garab mat kije.


daya bhav rakhije,
man re ! ant garab mat kije.


vair burai e chod irshya,
sat sangat nit kije.
ishwar sab ghat viraje,
e bata lakh lije.
man re ! ant garab mat kije.


gun ro hin hove jug mahi,
un se jag nhi dhije.
gun sagar dharan kar leve,
darash kiya dukh sije.
man re ! ant garab mat kije.


mat pita ri seva kije,
jag me aap sarije.
pavo lok parlok bhalai,
vekuntha me vas vasije.
man re ! ant garab mat kije.


aatho pahar hri gun gavo,
hari charan chit dije.
das dol ri aa hai vinti.
tar vilamb mat kije.
man re ! ant garab mat kije.


जरूर देखे :- रे संतो ! केहणा सुण ले मेरा

जरूर देखे :- साधु भाई ! जग सपना वाली

राजस्थानी निर्गुणी भजन लिरिक्स

~ मन रे ! अंत गरब मत कीजे ~

आया ने आदर दीजे ,नमस्कार निव कीजे।
इण बातो सु सायब राजी ,आछा गुण धारिजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

दया भाव राखिजे ,मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

वैर बुराई ए छोड़ ईर्ष्या ,सत संगत नित कीजे।
ईश्वर सब घट विराजे ,ए बाता लख लीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

गुण रो हीण होवे जुग माहि ,उण से जग नहीं धीजे।
गुण सागर धारण कर लेवे ,दरश किया दुःख सीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

मात पिता री सेवा कीजे ,जग में आप सरीजे।
पावो लोक परलोक भलाई,वैकुण्ठा में वास वसीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

आठो पहर हरि गुण गावो ,हरि चरण चित दीजे।
दास दोल री आ है विनती ,तार विलम्ब मत कीजे।
मन रे ! अंत गरब मत कीजे। टेर। ….

जगदीश बामनिया भजन

भजन :- अंत गरब मत कीजे
गायक :- जगदीश बामनिया
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर देखे :- रे संतो ! काल पकड़ ले जाई

जरूर देखे :- छोड़ दे मनवा मन मस्ती

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