छोड़ दे मनवा मन मस्ती सोंह शिखर गढ है बस्ती भजन लिरिक्स | Chod De Re Man Masti bhajan lyrics

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छोड़ दे मनवा मन मस्ती सोंह शिखर गढ है बस्ती भजन लिरिक्स

छोड़ दे मनवा मन मस्ती सोंह शिखर गढ है बस्ती भजन लिरिक्स, Chod De Re Man Masti marwadi chetavni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
संत मिलन को जाइये ,तज मान मोह अभिमान।
ज्यू ज्यू पांव आगे धरे ,कोटि यज्ञ समान।


~ छोड़ दे मनवा मन मस्ती ~

छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती।


इड़ा पिंगला अरदंग नारी ,
चाँद सूरज घर रह लगती।
गंगा जमुना बहे सरस्वती ,
स्वास स्वास की वही गिनती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….


अष्ट कमल में अलख विराजे ,
रंग महल में रह सगती।
चौबारा में दीपक जलता ,
वहा सुरता रहे जगती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….


हिये उतार हाथ धर लेणा ,
शीश उतार चले कुश्ती।
पांच तत्व गुण तीनू भेला ,
राखो जबर घणी है जब्ती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….


इसी नगर में डंका लागे ,
साध सुणेला कोई विरला सती।
झालर शंख पखावज बाजे ,
जिण बिच केलि करे हस्ती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….


गोरखनाथग मुक्ति के दाता ,
पल पल सिमरे पाव रती।
शरणे मछँदर गोरख बोले ,
अलख लख्या सो खरा जती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,
सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….


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marwadi chetavni bhajan lyrics

~ Chod De Re Man Masti ~

chhod de manva man masti,
sohan shikhar gad hai basti.


ida pingla ardang nari,
chand suraj ghar rah lagati.
ganga jamuna bahe saraswati,
swas swas ki vahi ginti.
chod de manva man masti,
sohan sikhar gad hai basti.


ashth kamal me alakh viraje,
rang mahal me rah sagati.
chobara me deepak jalta,
vaha surta rahe jagati.
chod de manva man masti,
sohan sikhar gad hai basti.


hiye utar hath dhar lena,
shish utar chale kushti.
panch tatv gun teenu bhela,
rakho jabar ghani hai jabti.
chod de manva man masti,
sohan sikhar gad hai basti.


isi nagar me danka lage,
sadh sunela koi virla sati.
jhalar sankh pakhavaj baje,
jin bich keli kare hasti.
chod de manva man masti,
sohan sikhar gad hai basti.


gorakhnath mukti ke data,
pal pal simre pav rati.
sharne machandar gorakh bole,
alakha lakhya so khara jati.
chod de manva man masti,
sohan sikhar gad hai basti.


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~ छोड़ दे मनवा मन मस्ती ~

छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती।

इड़ा पिंगला अरदंग नारी ,चाँद सूरज घर रह लगती।
गंगा जमुना बहे सरस्वती ,स्वास स्वास की वही गिनती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….

अष्ट कमल में अलख विराजे ,रंग महल में रह सगती।
चौबारा में दीपक जलता ,वहा सुरता रहे जगती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….

हिये उतार हाथ धर लेणा ,शीश उतार चले कुश्ती।
पांच तत्व गुण तीनू भेला ,राखो जबर घणी है जब्ती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….

इसी नगर में डंका लागे ,साध सुणेला कोई विरला सती।
झालर शंख पखावज बाजे ,जिण बिच केलि करे हस्ती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….

गोरखनाथग मुक्ति के दाता ,पल पल सिमरे पाव रती।
शरणे मछँदर गोरख बोले ,अलख लख्या सो खरा जती।
छोड़ दे मनवा मन मस्ती ,सोहन शिखर गढ़ है बस्ती। टेर ….

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भजन :- छोड़ दे मनवा मन मस्ती
गायक :- धनराज जोशी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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