साधु भाई अविगत लिखियो नी जाई भजन लिरिक्स | Avigat Likhiyo Ni Jai bhajan lyrics

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साधु भाई अविगत लिखियो नी जाई भजन लिरिक्स

साधु भाई अविगत लिखियो नी जाई भजन लिरिक्स, Avigat Likhiyo Ni Jai bhajan lyrics, chetawani bhajan hindi lyrics

।। दोहा ।।
दया करी गुरुदेव जी, मारियो सबद रो बाण।
अशुभ करम सब कु विचार, अबके पड़ी रे पहचाण।


~ अविगत लिखियो नी जाई ~

जो लिखे कोई संत शूरमा ,
नूर में तो नूर समाई।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई।


जैसे चंदा उदक माहि दरसे ,
ज्यू सायब सब माहि।
दे चस्मा घट भीतर देखो ,
नूर निरंतर माहि।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..


दूर से दूरा उर से उरेरा ,
हरी हिरदा रे माहि।
सपने नार गमायो बालको ,
जाग पड़े जद वहाँ ही।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..


जागी जोत जगी घट भीतर ,
जहाँ देखु वहा सो ही।
ऊगा भाण बीत गई रजनी ,
हरी हम अंतर नाहिं।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..


ममता मेट मिल्यो मोहन से ,
गुरु गम से अब पाई।
कहे बन्ननाथ सुणो भाई संतो ,
अब कुछ धोखा नाहिं।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..


जो लिखे कोई संत शूरमा ,
नूर में तो नूर समाई।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई।


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chetawani bhajan hindi lyrics

~ Avigat Likhiyo Ni Jai ~

jo likhe koi sant shurma,
nur me to nur samai.
sadhu bhai avigat likhiya ni jai.

jaise chanda udak mahi darse,
jyu sayab sab mahi.
de chsma ghat bhitar dekho,
nur nirantar mahi.
sadhu bhai avigat likhiya ni jai.

dur se dura ur se urera,
hari hirda re mahi.
sapne nar gamayo balko,
jag pade jad vaha hi.
sadhu bhai avigat likhiya ni jai.

jagi jot jagi ghat bhitar,
jaha dekhu vaha so hi.
uga bhan beet gai rajni,
hari ham antar nahi.
sadhu bhai avigat likhiya ni jai.

mamta met milyo mohan se,
guru gam se ab pai.
kahe banna nath suno bhai santo,
ab kuch dhokha nahi.
sadhu bhai avigat likhiya ni jai.

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~ अविगत लिखियो नी जाई ~

जो लिखे कोई संत शूरमा ,नूर में तो नूर समाई।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई।

जैसे चंदा उदक माहि दरसे ,ज्यू सायब सब माहि।
दे चस्मा घट भीतर देखो ,नूर निरंतर माहि।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..

दूर से दूरा उर से उरेरा ,हरी हिरदा रे माहि।
सपने नार गमायो बालको ,जाग पड़े जद वहाँ ही।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..

जागी जोत जगी घट भीतर ,जहाँ देखु वहा सो ही।
ऊगा भाण बीत गई रजनी ,हरी हम अंतर नाहिं।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..

ममता मेट मिल्यो मोहन से ,गुरु गम से अब पाई।
कहे बन्ननाथ सुणो भाई संतो ,अब कुछ धोखा नाहिं।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई। टेर। ..

जो लिखे कोई संत शूरमा ,नूर में तो नूर समाई।
साधु भाई ! अविगत लिखियो नी जाई।

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भजन :- अविगत लिखियो नी जाई
गायक :- धनराज जी जोशी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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