प्रेम का मार्ग बांका रे भजन लिरिक्स | prem ra marag baka re bhajan lyrics

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प्रेम का मार्ग बांका रे भजन लिरिक्स

प्रेम का मार्ग बांका रे भजन लिरिक्स, prem ra marag baka re bhajan lyrics, kabir das ji ke chetawani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
पोथी पढ़ पढ़ जनम हुआ, पंडित भया ना कोई।
ढाई अक्षर प्रेम का , पढ़े सो पंडित होई।


~ प्रेम रा मारग बाक़ा रे ~

प्रेम रा मारग बाक़ा रे ,
प्रेम रा मारग बाक़ा रे।
सूरा देवे शीश प्रेम में ,
अर्पण वाका रे।


प्रेम प्याला वो पिये ,
जो शीश दक्षिणा देत।
लोभी शीश नहीं देत है ,
नाम प्रेम का लेट।
नहीं है प्रेमी बाक़ा रे।
प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….


ये तो घर है प्रेम का ,
खाला का घर नाय।
शीश उतार धरयो चरणा में ,
जब बैठो घर माय।
मिटे मन कायर शंका रे ,
प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….


प्रेम न बाड़ी निपजे ,
प्रेम न हाट बिकाय।
राजा रानी रे चाव हो तो ,
सिर साठे ले जाय।
मुले मुक्ति रा नाका रे ,
प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….


योगी जग रा सेवरा ,
सन्यासी दरवेश।
प्रेम बिना पहुंचे नहीं ,
दुर्लभ हरी का देश।
लेश कर वर्णन थाका रे।
प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….


प्रेम प्याला वो पिये रे ,
चाखे अंधक रसाल।
दास कबीर जुगत कर पिया ,
मांगे शीश कलाल।
लगे नहीं काका बाबा रे।
प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….


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kabir das ji ke chetawani bhajan lyrics

~ prem ra marag baka re ~

prem ra marag baka re ,
prem ra marag baka re.
sura deve shish prem me,
arpan vaka re.


prem pyala wo piye,
jo shish dakshina det.
lobhi shish nhi det hai,
naam prem ka let.
nhi hai premi baka re.
prem ra marg baka re.


ye to ghar hai prem ka,
khala ka ghar naay.
shish utar dharyo charna me,
jab baitho ghar maay.
milte man kayar shanka re,
prem ra marg baka re.


prem ne badi nipje,
prem n haat bikay.
raja rani re chav ho to,
sir sathe le jaay.
mule mukti ra naka re,
prem ra marg baka re.


yogi jag ra sevra,
sanyasi darvesh.
prem bina pahuche nhi,
durlabh hari ka desh.
lesh kar varnan thaka re ,
prem ra marag baka re.


prem pyala wo piye re,
chakhe andhak rasale.
das kabir jugat kar piya,
mange shish kalal.
lage nhi kaka baba re,
prem ra marag baka re.


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~ प्रेम का मार्ग बांका रे ~

प्रेम रा मारग बाक़ा रे ,प्रेम रा मारग बाक़ा रे।
सूरा देवे शीश प्रेम में ,अर्पण वाका रे।

प्रेम प्याला वो पिये ,जो शीश दक्षिणा देत।
लोभी शीश नहीं देत है ,नाम प्रेम का लेट।
नहीं है प्रेमी बाक़ा रे। प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….

ये तो घर है प्रेम का ,खाला का घर नाय।
शीश उतार धरयो चरणा में ,जब बैठो घर माय।
मिटे मन कायर शंका रे ,प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….

प्रेम न बाड़ी निपजे ,प्रेम न हाट बिकाय।
राजा रानी रे चाव हो तो ,सिर साठे ले जाय।
मुले मुक्ति रा नाका रे ,प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….

योगी जग रा सेवरा ,सन्यासी दरवेश।
प्रेम बिना पहुंचे नहीं ,दुर्लभ हरी का देश।
लेश कर वर्णन थाका रे। प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….

प्रेम प्याला वो पिये रे ,चाखे अंधक रसाल।
दास कबीर जुगत कर पिया ,मांगे शीश कलाल।
लगे नहीं काका बाबा रे। प्रेम रा मारग बाक़ा रे। टेर। ….

shri sukhdev ji maharaj ke bhajan

भजन :- प्रेम रा मारग बाक़ा रे
गायक :- श्री सुखदेव जी महाराज
लेबल :- राजस्थानी भजन

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