तनधारी जग में अवधु कोई नहीं सुखिया रे भजन लिरिक्स | tandhari jag me avadhu bhajan lyrics

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तनधारी जग में अवधु कोई नहीं सुखिया रे भजन लिरिक्स

तनधारी जग में अवधु कोई नहीं सुखिया रे भजन लिरिक्स, tandhari jag me avadhu marwadi chetavni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
कोई तन दुखी कोई मन दुखी, कोई धन बिन फिरे रे उदास।
थोड़ा थोड़ा सब दुखी, सुखी राम का दास।


~ तनधारी जग में अवधू ~

तनधारी जग में अवधू ,
कोई नहीं सुखिया रे।
जनम लियोडा सब ,
दुखिया है रे लोक।


ब्रह्मा भी दुखिया अवधू ,
विष्णु भी दुखिया रे।
दुखिया दशो ,अवतारा है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,
कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …


धरती भी दुखिया अवधू ,
अम्बर भी दुखिया रे।
दुखिया पवना पाणी है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,
कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …


राजा भी दुखिया अवधू ,
प्रजा भी दुखिया रे।
दुखिया सकल संसारा है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,
कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …


शरणे मच्छेंद्र जती ,
गोरख बोले रे।
रामजी ने भजे वो ही सुखिया है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,
कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …


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marwadi chetavni bhajan lyrics

~  tandhari jag me avadhu ~

tandhari jag me avadhu,
koi nhi sukhiya re.
janam liyoda sab,
dukhiya hai re lok.


brahma bhi dukhiya avdhu,
vishnu bhi dukhiya re.
dukhiya dasho avtara hai re lok.
tandhari jag me avadhu,
koi nhi sukhiya re.


dharti bhi dukhiya avdhu,
ambar bhi dukhiya re.
dukhiya pavna pani hai re lok.
tandhari jag me avadhu,
koi nhi sukhiya re.


raja bhi dukhiya avdhu,
praja bhi dukhiya re.
dukhiya sakal sansara hai re lok.
tandhari jag me avadhu,
koi nhi sukhiya re.


sharne machhendr jati,
gorakh bole re.
ramji ne bhaje wo hi sukhiya hai re lok.
tandhari jag me avadhu,
koi nhi sukhiya re.


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~ तनधारी जग में अवधु ~

तनधारी जग में अवधू ,कोई नहीं सुखिया रे।
जनम लियोडा सब ,दुखिया है रे लोक।

ब्रह्मा भी दुखिया अवधू ,विष्णु भी दुखिया रे।
दुखिया दशो ,अवतारा है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …

धरती भी दुखिया अवधू ,अम्बर भी दुखिया रे।
दुखिया पवना पाणी है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …

राजा भी दुखिया अवधू ,प्रजा भी दुखिया रे।
दुखिया सकल संसारा है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …

शरणे मच्छेंद्र जती ,गोरख बोले रे।
रामजी ने भजे वो ही सुखिया है रे लोक।
तनधारी जग में अवधू ,कोई नहीं सुखिया रे। टेर। …

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भजन :- तनधारी जग में अवधू
गायक :- अनिल नागौरी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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