लिख दिया विधाता लेख नहीं टलने का भजन लिरिक्स | likh diya vidhata lekh nahi talne ka bhajan lyrics

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लिख दिया विधाता लेख नहीं टलने का भजन लिरिक्स

लिख दिया विधाता लेख नहीं टलने का भजन लिरिक्स, likh diya vidhata lekh nahi talne ka rajasthani marwadi chetawani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
सायब से सब होत है, बन्दे से कुछ नाय।
पर्वत से राई करे, राई परवत माय।


~ लिख दिया विधाता लेख ~

कछु राई घटे और ,
तिल नहीं बढ़ने का।
लिख दिया विधाता ,
लेख नहीं टलने का।


एक रथ पालकी ,
घोड़े पर चढ़ता है।
कोई सिर पर बोझा ,
लिया लिया फिरता है।
एक पाट पीताम्बर ,
वस्त्र पहने रहता है।
कोई गरीब बेचारा ,
पड़े ठण्ड मरता है।
एक वेमाता के हाथ है ,
अंक लिखने का।
लिख दिया विधाता ,
लेख नहीं टलने का। टेर। ….


एक लखपति सेठ ,
लाखो का बिणज करता है।
पड़ जावे टोटा ,
इधर उधर फिरता है।
एक चाँद सूरज ,
अधर जोत तपता है।
पड़ जावे फीका ,
जब ग्रहण पूर्ण लगता है।
करमो के भाव से ही ,
आदर मिलने का।
लिख दिया विधाता ,
लेख नहीं टलने का। टेर। ….


एक पूरी अयोध्या ,
बाग़ बड़ा गुलजारी।
दशरथ के घर में ,
रामचंद्र अवतारी।
एक राम लक्मण ,
संग में सीता नारी।
पिता वचन सुन ,
वन की करी तैयारी।
रावण ने खोय दी ,
सोने सरीखी गढ़ लंका।
लिख दिया विधाता ,
लेख नहीं टलने का। टेर। ….


एक हंसराज ,
समन्द बिच रहता है।
पुरबला पुण्य से ,
मोती चुग खाता है।
कीड़ी को कण ,
हाथी को मण देता है।
टुकनगिरी का ,
ख्याल अधर चलता है।
एक दिया जुण में ,
सच्चा नाम ईश्वर का।
लिख दिया विधाता ,
लेख नहीं टलने का। टेर। ….


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rajasthani marwadi chetawani bhajan lyrics

~ likh diya vidhata lekh ~

kachu rai ghate or til nhi bhadhne ka.
likh diya vidhata lekh nhi talne ka.


ek rath palki, ghode par chadta hai.
koi sir par bojha liya liya firta hai.
ek pat pitambar vatra pahne rahta hai.
koi garib bechara pade thand marta hai.
ek vemata ke hath hai ank likhne ka.
likh diya vidhata lekh nhi talne ka.


ek lakhpati seth lakho ka binaj karta hai.
pad jave tota edhar udhar firta hai.
ek chand suraj adhar jot tapta hai.
pad jave fika jab grahan purn lagta hai.
karmo ke bhav se hi aadar milne ka.
likh diya vidhata lekh nhi talne ka.


ek puri ayodhya bag bada guljari.
dashrath ke ghar me ramchandr avtari .
ek ram laxman sang me seeta nari.
pita vachan sun van ki kari taiyari.
ravan ne khoy di sone sarikhi gadh lanka.
likh diya vidhata lekh nhi talne ka.


ek hansraj samandra bich rahta hai.
purbla punye se moti chug khata hai.
kidi ko kan hathi ko man deta hai.
tukangiri ka khyal adhar chalta hai.
ek diya jun me sachcha nam ishwar ka.
likh diya vidhata lekh nhi talne ka.


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~ लिख दिया विधाता लेख ~

कछु राई घटे और ,तिल नहीं बढ़ने का।
लिख दिया विधाता ,लेख नहीं टलने का।

एक रथ पालकी ,घोड़े पर चढ़ता है।
कोई सिर पर बोझा ,लिया लिया फिरता है।
एक पाट पीताम्बर ,वस्त्र पहने रहता है।
कोई गरीब बेचारा ,पड़े ठण्ड मरता है।
एक वेमाता के हाथ है ,अंक लिखने का।
लिख दिया विधाता ,लेख नहीं टलने का। टेर। ….

एक लखपति सेठ ,लाखो का बिणज करता है।
पड़ जावे टोटा ,इधर उधर फिरता है।
एक चाँद सूरज ,अधर जोत तपता है।
पड़ जावे फीका ,जब ग्रहण पूर्ण लगता है।
करमो के भाव से ही ,आदर मिलने का।
लिख दिया विधाता ,लेख नहीं टलने का। टेर। ….

एक पूरी अयोध्या ,बाग़ बड़ा गुलजारी।
दशरथ के घर में ,रामचंद्र अवतारी।
एक राम लक्मण ,संग में सीता नारी।
पिता वचन सुन ,वन की करी तैयारी।
रावण ने खोय दी ,सोने सरीखी गढ़ लंका।
लिख दिया विधाता ,लेख नहीं टलने का। टेर। ….

एक हंसराज ,समन्द बिच रहता है।
पुरबला पुण्य से ,मोती चुग खाता है।
कीड़ी को कण ,हाथी को मण देता है।
टुकनगिरी का ,ख्याल अधर चलता है।
एक दिया जुण में ,सच्चा नाम ईश्वर का।
लिख दिया विधाता ,लेख नहीं टलने का। टेर। ….

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भजन :- लिख दिया विधाता लेख
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लेबल :- राजस्थानी भजन

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