गुरु कितना दे उपदेश मूरख थारे एक नहीं लागे भजन लिरिक्स | guru kitna de updesh bhajan lyrics

1823

गुरु कितना दे उपदेश मूरख थारे एक नहीं लागे भजन लिरिक्स

गुरु कितना दे उपदेश मूरख थारे एक नहीं लागे भजन लिरिक्स, guru kitna de updesh bhajan lyrics, nirguni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
हस्ती बांधा ठान पे,लश्कर पड़ी पुकार।
दरवाजा जड़िया रया, निकल गया असवार।


~ गुरु कितना दे उपदेश ~

गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे।
एक नहीं लागे रे मूरख थारे ,
एक नहीं लागे।
गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे।


सूखा लकड़ा ने घणो घणो पियो ,
नहीं पान फूल लागे।
इण कागला ने घणो बणायो ,
तरहा तरहा बोले।
गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….


इण कायर रे बांध्यो सेंवरो ,
करियो फौज रे आगे।
भाला री आ अणि देखने ,
दुरो दुरो भागे।
गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….


इण नुगरा ने ज्ञान बतायो ,
नहीं ज्ञान ध्यान लागे।
अमल ने तो घणो घोलियो ,
तो भी जहर आवे।
गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….


रामानंद गुरु पूरा मिलिया ,
अकरा भरम भागे।
कहे कबीर सुणो भाई साधु ,
मेरा देश आगे।
गुरु कितना दे उपदेश ,
मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….


जरूर पढ़ें :- जिणरो परमारथ म्हारो जूनो जोगी जाणे

जरूर पढ़ें :- मनवा राखे नी विश्वास

nirguni bhajan lyrics in hindi

~ guru kitna de updesh ~

guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.
ek nhi lage re murakh thare,
ek nhi lage .
guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.


sukh lakada ne ghano ghano piyo,
nhi pan ful lage.
en kagla ne ghano banayo,
taraha taraha bole.
guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.


en kayar re bandhyo senvero,
kariyo foj re aage.
bhala ri aa ani dekhne,
duro duro bhage.
guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.


en nugra ne gyan batayo,
nhi gyan dhwan lage.
amal ne to ghano gholiyo,
to bhi jahar aave.
guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.


ramanand guru pura miliya,
akra bharam bhage.
kahe kabir suno bhai sadhu,
mera desh aage.
guru kitna de updesh,
murakh thare ek nhi lage.


जरूर पढ़ें :- थारी चुनड़ली रा चटका है दिन चार

जरूर पढ़ें :- हालो दीवाना यहाँ क्यों बैठा

निर्गुणी भजन तंबूरा राजस्थानी

~ गुरु कितना दे उपदेश ~

गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे।
एक नहीं लागे रे मूरख थारे ,एक नहीं लागे।
गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे।

सूखा लकड़ा ने घणो घणो पियो ,नहीं पान फूल लागे।
इण कागला ने घणो बणायो ,तरहा तरहा बोले।
गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….

इण कायर रे बांध्यो सेंवरो ,करियो फौज रे आगे।
भाला री आ अणि देखने ,दुरो दुरो भागे।
गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….

इण नुगरा ने ज्ञान बतायो ,नहीं ज्ञान ध्यान लागे।
अमल ने तो घणो घोलियो ,तो भी जहर आवे।
गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….

रामानंद गुरु पूरा मिलिया ,अकरा भरम भागे।
कहे कबीर सुणो भाई साधु ,मेरा देश आगे।
गुरु कितना दे उपदेश ,मूरख थारे एक नहीं लागे। टेर। ….

prahlad tipaniya ke bhajan

भजन :- गुरु कितना दे उपदेश
गायक :- प्रहलाद टिपानिया
लेबल :- राजस्थानी भजन

जरूर पढ़ें :- जो थारो मनवो कियो नही माने

जरूर पढ़ें :- क्यों नैना भरमावे जी

पिछला लेखजिणरो परमारथ म्हारो जूनो जोगी जाणे भजन लिरिक्स | jinro parmarath mharo juno jogi jane bhajan lyrics
अगला लेखइन रे आंगणिये सखी कई नर खेलन आया भजन लिरिक्स | In Re Aanganiye Sakhi bhajan lyrics

5 टिप्पणी

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

5 × 3 =