जोगणिया थारो ऊंचो देश अखंड भजन लिरिक्स | joganiya tharo uncho desh akhand bhajan lyrics

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जोगणिया थारो ऊंचो देश अखंड भजन लिरिक्स

जोगणिया थारो ऊंचो देश अखंड भजन लिरिक्स joganiya tharo uncho desh akhand joganiya mata ke bhajan lyrics

।। दोहा ।।
कीर्ति मुकुट कुण्डल किरण, चोली चमकत हीर।
घेर गुमारो घागरो, मैया ओडन दखणी रो चीर।


~ थारो ऊंचो देश अखंड ~

जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड।
ऊंचो गणो देश अखंड ,
भवानी थारो ,
ऊंचो देश अखंड।


मुल्क मेवाड़ा माई प्रकटी ,
जोगणिया जगदम्ब।
चलके है चितोड़ दुर्ग पे ,
मंदिर ज्याको अखंड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


चमके है चितोड़ दुर्ग पे ,
मंदिर रो अंग।
दिखे है दुरा सु उडतो ,
मंदरिया रो धज दंड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


चकर पूजा की भेट चढ़े ,
अजिया सुखरो मुण्ड।
शिवजी का शिवालय सामे ,
जल से भरियो है कुण्ड।
भवानी थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


गाजत सिंह गनेरा आवे ,
खाय खादी रा खण्ड।
थारा रे हिरदा में राखो ,
दुस्टा ने देवे दण्ड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


पाप विचारियो पापी राजा ,
खूब कियो परचण्ड।
दुर्ग छोड़ ने आई अम्बा ,
बहार आई लोवे कण्ड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


तंड मुण्ड और दानव दल ने ,
चुरिया थे चामण्ड।
सुमिरण सुणो भाई सासु मालन ,
करियो धुप प्रचंड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


शक्ति रूप सीता ने धरिया ,
रावण का दस मुण्ड।
भगड़ावत ने झुजाया थे मत ,
रोप दी रण चंड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


देशा विदेश प्रकटे ठावी ,
घर घर ज्योत अखंड।
गांव केमरियो नाम है भेरव ,
कथ गावे अखंड।
जोगणिया थारो ,
ऊंचो देश अखंड । टेर।


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joganiya mata ke bhajan lyrics in hindi

~  joganiya tharo uncho desh akhand ~

joganiya tharo,
uncho desh akhand.
uncho gano desh akhand,
bhavani tharo,
uncho desh akhand.


mulk mewada mai prakti,
joganiya jagadamb.
chalke hai chitod durg pe,
mandir jyako akhand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


chamke hai chitod durg pe,
mandir ro ang.
dikhe hai dura su udto,
mandriya ro dhaj dand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


chakar puja ki bhet chade,
ajiya sukhro mund.
shivji ka shivalay same,
jal se bhariyo hai kund.
bhavani tharo,
uncho desh akhand.


gajat singh ganera aave,
khay khadi ra khand.
thara re hirda me rakho,
dusta ne deve dand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


pap vichariyo papi raja,
khub kiyo parchand.
durg chhod ne aai amba,
bahar aai love kand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


tand mund or danav dal ne,
churiya the chamand.
sumiran suno bhai sasu malan,
kariyo dhup prachand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


shakti rup seeta ne dhariya,
ravan ka das mund.
bhagdawat ne jhujaya the mat,
rop di ran chand.
joganiya tharo,
uncho desh akhand.


desha videsh prakte thavi,
ghar ghar jyot akhand.
gav kemriyo nam hai bherav,
kath gave akhand.


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~ जोगणिया थारो ऊंचो देश अखंड ~

जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड।
ऊंचो गणो देश अखंड ,
भवानी थारो ,ऊंचो देश अखंड।

मुल्क मेवाड़ा माई प्रकटी ,जोगणिया जगदम्ब।
चलके है चितोड़ दुर्ग पे ,मंदिर ज्याको अखंड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

चमके है चितोड़ दुर्ग पे ,मंदिर रो अंग।
दिखे है दुरा सु उडतो ,मंदरिया रो धज दंड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

चकर पूजा की भेट चढ़े ,अजिया सुखरो मुण्ड।
शिवजी का शिवालय सामे ,जल से भरियो है कुण्ड।
भवानी थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

गाजत सिंह गनेरा आवे ,खाय खादी रा खण्ड।
थारा रे हिरदा में राखो ,दुस्ता ने देवे दण्ड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

पाप विचारियो पापी राजा ,खूब कियो परचण्ड।
दुर्ग छोड़ ने आई अम्बा ,बहार आई लोवे कण्ड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

तंड मुण्ड और दानव दल ने ,चुरिया थे चामण्ड।
सुमिरण सुणो भाई सासु मालन ,करियो धुप प्रचंड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

शक्ति रूप सीता ने धरिया ,रावण का दस मुण्ड।
भगड़ावत ने झुजाया थे मत ,रोप दी रण चंड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

देशा विदेश प्रकटे ठावी ,घर घर ज्योत अखंड।
गांव केमरियो नाम है भेरव ,कथ गावे अखंड।
जोगणिया थारो ,ऊंचो देश अखंड । टेर।

gopal das ke bhajan lyrics

भजन :- जोगणिया थारो ऊंचो देश अखंड
गायक :- गोपाल दास वैष्णव
लेबल :- राजस्थानी भजन

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