पीले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी भजन | Pile amiras dhara gagan me jhadi lagi bhajan lyrics

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पीले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी भजन

पीले अमीरस धरा गगन में झड़ी लगी भजन लिरिक्स, Pile amiras dhara gagan me jhadi lagi nirguni bhajan lyrics

।। दोहा ।।
अमृत केरी मोठरी, राखो सतगुरु छोर।
आप सरिका जो मिले, ताही पिलावे छोड़।


~ पीले अमीरस धारा ~

पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी।
झड़ी लगी रे झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी।


बुंद का प्यासा घड़ा भर पाया,
सपने में वो स्वाद न आया।
कौन किसे कैसे समझाये,
एक बुंद की तरण लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी। टेर।


प्यास बीना क्या पीये रे पाणी ,
प्यास के लिये हे वो पाणी।
बीना अधिकार कोई नही जाणी,
अमृत रस की झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी। टेर।


अमृत पीये अमर पद पावे,
भव योनी में कभी न आवे।
जरा मरण को दुःख न सावे ,
थारे घट गगरीया भरण लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी। टेर।


अमृत बुंद गुरूजी की बाणी,
जीवन रस्ता है यह बाणी।
कबीर संगत में हो हमारी,
डाली प्रेम की वा हरी लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी। टेर।


पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी।
झड़ी लगी रे झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,
गगन में झड़ी लगी।


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nirguni bhajan lyrics in hindi

~ Pile amiras dhara gagan me jhadi lagi ~

pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.
jhadi lagi re jhadi lagi.
pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.


bund ka pyasa ghada bhar paya,
sapne me wo swad n aaya.
kon kise kaise samjhaye,
ek bund ki taran lagi.
pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.


pyas bina kya piye re pani,
pyas ke liye hai wo pani.
bina adhikar koi nhi jani,
amrit ras ki jhadi lagi.
pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.


amrit piye amar pad pave,
bhav yoni me kabhi na aave.
jara maran ko dukh n save,
thare ghat gagriya bharan lagi.
pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.


amrit bund guruji ki bani,
jivan rasta hai yah bani.
kabir sangat me ho hamari,
dali prem ki wa hari lagi.
pile amiras dhara,
gagan me jhadi lagi.


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~ पीले अमीरस धरा गगन में झड़ी लगी ~

पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी।
झड़ी लगी रे झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी।

बुंद का प्यासा घढ़ा भर पाया, सपने में वो स्वाद न आया।
कौन किसे कैसे समझाये, एक बुंद की तरण लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी। टेर।

प्यास बीना क्या पीये रे पाणी ,प्यास के लिये हे वो पाणी।
बीना अधिकार कोई नही जाणी, अमृत रस की झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी। टेर।

अमृत पीये अमर पद पावे, भव योनी में कभी न आवे।
जरा मरण को दुःख न सावे , थारे घट गगरीया भरण लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी। टेर।

अमृत बुंद गुरूजी की बाणी, जीवन रस्ता है यह बाणी।
कबीर संगत में हो हमारी, डाली प्रेम की वा हरी लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी। टेर।

पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी।
झड़ी लगी रे झड़ी लगी।
पीले अमीरस धारा ,गगन में झड़ी लगी।

nand lal bhat ke nirguni bhajan

भजन :- पीले अमीरस धारा
गायक :- नंदलाल भाट
लेबल :- राजस्थानी भजन

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