मारी जोगणिया जगदंबा थे आजो म्हारे पावणी भजन लिरिक्स | jagdamba the aajo mare pavani bhajan lyrics

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मारी जोगणिया जगदंबा थे आजो म्हारे पावणी भजन लिरिक्स

मारी जोगणिया जगदंबा थे आजो म्हारे पावणी भजन लिरिक्स jagdamba the aajo mare pavani mataji ki lavani bhajan lyrics

।। दोहा ।।
कीर्ति मुकुट कुण्डल किरण, चोली चमकत हीर।
घेर गुमारो घागरो, मैया ओडन दखणी रो चीर।


~ जगदम्ब थे आजो म्हारे पामणी ~

म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी।
आजो म्हारे पामणी जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी।


ऐ माजी बैठ काया के बिच ,
ज्ञान उपामणि ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी।


करदे ज्ञान भजन को उजालो ,
अरे गर्दन ऊपर नालो।
चलादो शक्ति थारो चाळो ,
सभा रंग लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी। टेर।


झलके रूप जगामग थारो ,
मारा धरिया कारज सारो।
जरणी आप बिना कुण मारो ,
दया गुट पिलावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी। टेर।


खोलदो अन्न धन का भंडारा ,
जरणी खेल रचा दो थारा।
सुधारो मारा मनक जमारा ,
बिगड़ी बात बनावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी। टेर।


जोत अखंड जलावा जामण ,
टाळो मुठ नजर और कामण।
नर घमंड ने झुकामण ,
लक्मी लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी। टेर।


काया दुःख संकट सु भरी ये ,
मारी खबर क्यों ना करी ये।
देहि राखो हरी भरी ,
शंकर गावे लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,
थे आजो म्हारे पामणी। टेर।


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mataji ki lavani bhajan lyrics

~ jagdamba the aajo mare pavani ~

mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare panani.
aajo mhare pamani jagadamb,
the aajo mhare pamani.


e maji baith kaya ke bich,
gyan upamani ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


karde gyan bhajan ko ujalo,
are gardan upar nalo.
chalado shakti tharo chalo,
sabha rang lavni ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


jhalake rup jagamag tharo,
mara dhariya karaj saro .
jarni aap bina kun maro,
daya gut pilavani ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


kholdo ann dhan ka bhandara,
jarani khel racha do thara.
sudharo mara manak jamara,
bigdi baat banavni ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


jot akhand jalava jaman,
talo muth najar or kaman.
nar ghamand ne jhukaman,
laxmi lavani ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


kaya dukh sankat su bhari ye,
mari khabarkyu na kari ye.
dehi rakho hari bhari,
shankar gave lavni ye.
mhari jogniya jagdamb,
the aajo mhare pamani.


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~ जगदम्ब थे आजो म्हारे पामणी~ 

म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी।
आजो म्हारे पामणी जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी।

ऐ माजी बैठ काया के बिच ,ज्ञान उपामणि ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी।

करदे ज्ञान भजन को उजालो ,अरे गर्दन ऊपर नालो।
चलादो शक्ति थारो चाळो ,सभा रंग लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी। टेर।

झलके रूप जगामग थारो ,धरिया कारज सारो।
जरणी आप बिना कुण मारो ,दया गुट पिलावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी। टेर।

खोलदो अन्न धन का भंडारा ,जरणी खेल रचा दो थारा।
सुधारो मारा मनक जमारा ,बिगड़ी बात बनावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी। टेर।

जोत अखंड जलावा जामण ,टाळो मुठ नजर और कामण।
नर घमंड ने झुकामण ,लक्मी लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी। टेर।

काया दुःख संकट सु भरी ये ,मारी खबर क्यों ना करी ये।
देहि राखो हरी भरी ,शंकर गावे लावणी ये।
म्हारी जोगणिया जगदम्ब ,थे आजो म्हारे पामणी। टेर।

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भजन :- जगदम्ब थे आजो म्हारे पामणी
गायक :- नंदलाल भाट
लेबल :- राजस्थानी भजन

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