मत ले रे जिवडा नींद हरामी भजन लिरिक्स | mat le re jivda neend harami bhajan lyrics

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मत ले रे जिवडा नींद हरामी भजन लिरिक्स

मत ले रे जिवडा नींद हरामी भजन लिरिक्स, mat le re jivda neend harami chetawani bhajan lyrics in hindi

।। दोहा ।।
सुता सुता क्या करो, सुता ने आवे नींद।
जम सिराने आन खड़ो, ज्यू तोरण आयो बिन्द।


~ मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी ~

मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे।
थोडा दीना रे खातिर काई सोवे ,
मनक जमारो ने ऐड़ो खोवे।


थारा घट में घोर अंधेरो ,
परघर दिवला काई जोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।


थारा घट में तो खान हीरा की,
कर्म कातरी ने काई रोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।


थारा घट में बाग़ चन्दन को,
बिज बावलिया रो क्यों बोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।


थारा घट में तो समुद्र भरिया है,
कादा में कपड़ा काई धोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।


कहत कबीर राम ने भज ले,
अंत समय मे पड़ियो रोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी,
नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।


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chetawani bhajan lyrics in hindi

~ mat le re jivda neend harami ~

mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.
thoda dina re khatir kai sove,
manak jamaro ne aido khove.


thara ghat me ghor andhero,
par ghar diwla kai jove.
mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.


thara ghat me to khan heera ki,
karm katri ne kai rove.
mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.


thara ghat me baag chandan ko,
beej bawaliya ro kyo bove.
mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.


thara ghat me to samudra bhariya hai,
kada me kapda kai dhove.
mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.


kahat kabir ram ne jal le,
ant samay me padiyo rove.
mat le re jivda nind harami,
nind aalsi.
thoda dina re khatir kai sove.


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~ मत ले रे जिवडा नींद हरामी ~

मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे।
थोडा दीना रे खातिर काई सोवे ,
मनक जमारो ने ऐड़ो खोवे।

थारा घट में घोर अंधेरो ,परघर दिवला काई जोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।

थारा घट में तो खान हीरा की, कर्म कातरी ने काई रोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।

थारा घट में बाग़ चन्दन को, बिज बावलिया रो क्यों बोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।

थारा घट में तो समुद्र भरिया है, कादा में कपड़ा काई धोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।

कहत कबीर राम ने भज ले,अंत समय मे पड़ियो रोवे।
मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी, नींद आलसी।
थोडा दीना रे खातिर ,काई सोवे। टेर।

sunita swami ke bhajan lyrics

भजन :- मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी
गायिका :- सुनीता स्वामी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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