काया का पिंजरा डोले रे सांस का पंछी बोले भजन लिरिक्स | kaya ka pinjra dole re bhajan lyrics

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काया का पिंजरा डोले रे सांस का पंछी बोले भजन लिरिक्स

काया का पिंजरा डोले रे सांस का पंछी बोले भजन लिरिक्स, kaya ka pinjra dole re hansla bhajan lyrics in hindi

।। दोहा ।।
कबीर कुआ एक है, पनिहारी अनेक।
बर्तन सब के न्यारे न्यारे, पानी सब में एक।


~ काया का पिंजरा डोले रे ~

काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे।
पिंजरा डोले रे ,
काया का पिंजरा डोले रे।


तन नगरी मन मंदिर है ,
परमांत्मा इसके अंदर है।
दो नैन असंख्य समुन्द्र है ,
पापी पाप को धोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे। टेर।


ले के साक्षी जाना है ,
और जाने से क्या घबराना है।
ये दुनिया मुसाफिर खाना है,
तूँ जाग जगत ये सोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे। टेर।


कर्म अनुसारी फल ले रे,
और मनमानी अपनी करले रे।
तेरा घमंड सारा झडले रे,
अभिमानी मान क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे। टेर।


मातपिता भाईबहन पतिपत्नी,
कोई नहीं तूँ किसी का रे।
कह कबीर झगड़ा जीते जी का,
अब मन ही मन क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे,
सांस का पंछी बोले रे। टेर।


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hansla bhajan lyrics in hindi

~ kaya ka pinjra dole re ~

kaya ka pinjra dole re,
sans ka panchi bole re.
pinjra dole re ,
kaya ka pinjra dole re.


tan nagari man mandir hai,
parmantma eske andar hai.
do nain asankh samundr hai,
papi pap ko dhole re.
kaya ka pinjra dole re,
sans ka panchi bole re.


le ke sakshi jana hai,
or jane se kya ghabrana hai.
ye duniya musafir khana hai,
tu jag jagat ye sole re.
kaya ka pinjra dole re,
sans ka panchi bole re.


karm anusari fal le re,
or manmani apni karle re.
tera ghamand sara jhadle re,
abhimani maan kyu dole re.
kaya ka pinjra dole re,
sans ka panchi bole re.


mata peeta bhai bahan pati patni,
koi nhi tu kisi ka re.
kah kabir jhagda jite ji ka,
ab man hi man kyu dole re.
kaaya ka pinjra dole re,
sans ka panchi bole re.


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~ काया का पिंजरा डोले रे ~

काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे।
पिंजरा डोले रे ,काया का पिंजरा डोले रे।

तन नगरी मन मंदिर है ,परमांत्मा इसके अंदर है।
दो नैन असंख्य समुन्द्र है ,पापी पाप को धोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे। टेर।

ले के साक्षी जाना है , और जाने से क्या घबराना है।
ये दुनिया मुसाफिर खाना है, तूँ जाग जगत ये सोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे। टेर।

कर्म अनुसारी फल ले रे, और मनमानी अपनी करले रे।
तेरा घमंड सारा झडले रे , अभिमानी मान क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे। टेर।

मातपिता भाईबहन पतिपत्नी, कोई नहीं तूँ किसी का रे।
कह कबीर झगड़ा जीते जी का,अब मन ही मन क्यूँ डोले रे।
काया का पिंजरा डोले रे, सांस का पंछी बोले रे। टेर।

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भजन :- काया का पिंजरा डोले रे
गायक :- नंदलाल भाट
लेबल :- राजस्थानी भजन

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