बार बार यूं कहे ब्राह्मणी सुनो सुदामा दास भजन लिरिक्स | Baar Baar Yu Kahe Brahmani bhajan lyrics

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बार बार यूं कहे ब्राह्मणी सुनो सुदामा दास भजन लिरिक्स

बार बार यूं कहे ब्राह्मणी सुनो सुदामा दास भजन लिरिक्स Baar Baar Yu Kahe Brahmani bhajan lyrics krishna sudama ke bhajan lyrics

~ बार बार यु कहे ब्राह्मणी ~

बार बार यु कहे ब्राह्मणी ,
सुनो सुदामा दास।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ।


पूछे द्वारका जाय ,
कन्हैयो कहा रहे।
फाटा कपडा देख ,
मसखरी सारा करे।
इतने में एक मिलियो दयालु ,
दिनों महल बताय।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


द्वारपाल जाय कयो ,
आदमी एक आया।
फाटा कपडा नाम ,
सुदामा बतलाया।
सुनते ही अब नंगे पेरो ,
दौड़े कृष्ण मुरार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


मिलिया गले लगाय ,
सिंहासन बैठायो।
देख दशा आ दिन ,
जिवडो दुःख पायो।
आसु जल से पैर धो रहे ,
जग के पालनहार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


करी खातरी खूब ,
सुदामा शरमायो।
चावल केरी पोट ,
खाक में छुप कायो।
नजर पड़ी जब कृष्ण चंद्र की ,
लीवी भुजा पसार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


दोय मुठी खाय ,
तीसरी भरने लगे।
रुकमणी पकड्यो हाथ ,
नाथ क्या करने लगे।
तीन लोक दे दियो सांवरा ,
हम हो गये बेकार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


राख्यो दो दिन चार ,
जद फिर विदा कयो।
मुख से माग्यो नाय ,
नाय कुछ हरी दियो।
चले सोचकर पूछे ब्राह्मणी ,
क्या दुला जवाब।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


पहुंच्यो नगरी माय ,
झोपडी नहीं मिली।
महला ऊपर बैठी ,
ब्राह्मणी बुला रही।
दासी आकर यु बुलावे ,
थे घर के बार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


चकित भये सब देख ,
कन्हैयो खूब करी।
महिमा अपरम्पार ,
सुदामा कहे हरी।
भक्त मण्डली हिलमिल गावे ,
साहेब के दरबार।
चावल की पोट लेकर ,
जावो द्वारका नाथ। टेर।


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krishna sudama ke bhajan lyrics in hindi

~ Baar Baar Yu Kahe Brahmani ~

bar bar yu kahe brahamani,
suno sudama das.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


puche dwarka jay,
kanhaiyo kaha rahe.
fata kapada dekh,
maskhari sara kare.
etne me ek miliyo dayalu,
dino mahal batay.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


dwarpal jay kayo,
aadmi ek aaya.
fata kapada naam,
sudama batlaya.
sunte hi ab nange pero,
dode krishn murar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


miliya gale lagay,
sinhasan baithayo.
dekh dasha aa din,
jivdo dukh payo.
asu jal se per dho rahe,
jag ke palanhar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


kari khatri sub,
sudama sharmayo.
chaval keri pot,
khak me chup kayo.
najar padi jab krishn chandr ki,
livi bhuja pasar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


doy muthi khay,
tisri bharne lage.
rukamani pakadyo hath,
nath kya karne lage.
teen lok de diyo sanwara,
ham ho gaye bekar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


rakhyo do din char,
jad fir vida kayo.
mukh se magyo nay,
nay kuch hari diyo.
chale sochkar puche brahmani,
kya dula javab.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


pahuchyo nagari may,
jhopadi nhi mili.
mahla upar baithi,
brahamani bula rahi.
dasi aakar yu bulave,
the ghar ke baar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


chakit bhaye sab dekh,
kanhaiyo khub kari.
mahima aparampar,
sudama kahe hari.
bhakt mandli hilmil gave,
saheb ke darbar.
chaval ki pot lekar,
javo dwarka nath.


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कृष्ण सुदामा भजन लिरिक्स

~ बार बार यूं कहे ब्राह्मणी ~

बार बार यु कहे ब्राह्मणी ,सुनो सुदामा दास।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ।

पूछे द्वारका जाय ,कन्हैयो कहा रहे।
फाटा कपडा देख ,मसखरी सारा करे।
इतने में एक मिलियो दयालु ,दिनों महल बताय।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

द्वारपाल जाय कयो ,आदमी एक आया।
फाटा कपडा नाम ,सुदामा बतलाया।
सुनते ही अब नंगे पेरो ,दौड़े कृष्ण मुरार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

मिलिया गले लगाय ,सिंहासन बैठायो।
देख दशा आ दिन ,जिवडो दुःख पायो।
आसु जल से पैर धो रहे ,जग के पालनहार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

करी खातरी खूब ,सुदामा शरमायो।
चावल केरी पोट ,खाक में छुप कायो।
नजर पड़ी जब कृष्ण चंद्र की ,लीवी भुजा पसार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

दोय मुठी खाय ,तीसरी भरने लगे।
रुकमणी पकड्यो हाथ ,नाथ क्या करने लगे।
तीन लोक दे दियो सांवरा ,हम हो गये बेकार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

राख्यो दो दिन चार ,जद फिर विदा कयो।
मुख से माग्यो नाय ,नाय कुछ हरी दियो।
चले सोचकर पूछे ब्राह्मणी ,क्या दुला जवाब।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

पहुंच्यो नगरी माय ,झोपडी नहीं मिली।
महला ऊपर बैठी ,ब्राह्मणी बुला रही।
दासी आकर यु बुलावे ,थे घर के बार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

चकित भये सब देख ,कन्हैयो खूब करी।
महिमा अपरम्पार ,सुदामा कहे हरी।
भक्त मण्डली हिलमिल गावे ,साहेब के दरबार।
चावल की पोट लेकर ,जावो द्वारका नाथ। टेर।

moinuddin manchala ke desi bhajan

भजन :- बार बार यु कहे ब्राह्मणी
गायक :- मोइनुद्दीन मनचला
लेबल :- राजस्थानी भजन

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