श्री राम दया के सागर है भजन लिरिक्स | shri ram daya ke sagar hai bhajan lyrics

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श्री राम दया के सागर है भजन लिरिक्स

श्री राम दया के सागर है भजन shri ram daya ke sagar hai shree ram ji bhajan lyrics in hindi

 ~ श्री राम दया के सागर है ~

है रघुनन्दन सब दुख भंजन,
राघव कमल उजागर है।
श्री राम दया के सागर है।


पत्थर की शिला गौतम नारी ,
बन गई श्राप की मारी थी।
उसे राग भई बैराग भई,
फिर भी आस तुम्हारी थी।
छुआ चरण से शिला को ,
रघुवरने तत्काल।
पग लगते ही बन गई वो ,
गौतम नारी निहाल।

क्या पांव मैं तेरे जादु भरा है,
पत्थर भी नर बन जाते है।
श्री राम दया के सागर है।


फिर एक वन में गिध्द पडा ,
राम ही राम पुकारता था।
कटे हुए पंखो की पीडा से ,
अपने प्राणो को हारता था।
सियाराम कहने लगे ,
वो ही हुं मैं राम।
उठो गिध्दपति देखलो ये ,
राम तुम्हे करे प्रणाम।
हट जाओ मुझे मरने दो।
माता का दिया राममंन्त्र का,
आराधन मुझको करने दो।

खग जग का तु भेद ना जाने,
समझे सबको बराबर है।
श्री राम दया के सागर है।


गिध्द राज के दुखो का ,
करते हुए बखान।
जा पँहुचे सबरी के घर ,
कृपा सिधु भगवान।
सुन्दर पत्तो के आसन पर ,
अपने प्रभु को बैठाती है।
मेहमानी के खातिर कुछ ,
डलिया बैरों की लाती है।
भिलनी का सच्चा भाव देख ,
राघवजी भोग लगाते है।
उन बार बार झुट् बैरो का ,
रूचि रूचि कर भोग लगाते।
ले लो लक्षमण तुम भी ले लो ,
ये बैर सुधा से बढकर है।
सीता का दिया भोजन भी ,
होता नहीं इतना रूचिकर है।
ये सुनकर भिलनी के हुआ आन्नद।
देवता भी बोलते जयति सच्चिदानन्द।

गद गद होकर भिलनी बोली,
तुम ठाकुर हम चाकर है,
श्री राम दया के सागर है।


है रघुनन्दन सब दुख भंजन,
रघुकुल कमल उजागर है,
श्रीं राम दया के सागर है।


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shree ram ji bhajan lyrics in hindi

~ shri ram daya ke sagar hai ~

hai raghunandan sab dukh bhanjan,
raghav kamal ujagar hai.
shri ram daya ke sagar hai.


paththar ki shila gotam nari,
ban gai srap ki mari thi.
use rag bhai bairag bhai,
fir bhi aas tumhari thi.
chua charan se shila ko ,
raghuvara ne tatkal.
pag lagte hi ban gai wo,
gotam nari nihal.

kya panw me tere jadu bhara he,
paththar bhi nar ban jate hai.
shri ram daya ke sagar hai.


fir ek van me gidhdh pada ,
ram hi ram pukarata tha.
kate hua pankho ki pida se,
apne prano ko harata tha.
siyaram kahne lage,
wo hi hu me ram.
otho gidhdhpati dekhlo ye,
ram tumhe kare pranam.
hat jao mujhe marane do,
mata ka diya ram mantra ka ,
aaradhan mujhko karne do.

khag jag ka tu bhed na jane,
samjhe sabko barabar hai.
shri ram daya ke sagar hai.


gidhdh raj ke dukho ka,
karte hua bakhan.
ja pahuche sabri ke ghar,
krupa sidhu bhagwan.
sundar patto ke aaan par,
apne prabhu ko baithati hai.
mehmani ke khatir kuch,
daliya bero ki lati hai.
bhilni ka sachcha bhav dekh,
raghav ji bhog lagate hai.
un bar bar jhute bero ka,
ruchi ruchi kar bhog lagate hai.
lel lo laxman tum bhi le lo,
ye ber sudha se badhkar hai.
sita ka diya bhojan bhi,
hota nhi etna ruchikar hai.
ye sunkar bhilni ke hua aannad,
devta bhi bolte jayti sachchidanand.

gad gad hokar bhilni boli,
tum thakur ham chakar hai.
shri ram daya ke sagar hai.


hai raghunanad sab dukh bhajan,
raghukul kamal ujagar hai.
shri ram daya ke sagar hai .


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राम जी भजन लिरिक्स

~ श्री राम दया के सागर है ~

है रघुनन्दन सब दुख भंजन,राघव कमल उजागर है।
श्री राम दया के सागर है।

पत्थर की शिला गौतम नारी ,बन गई श्राप की मारी थी।
उसे राग भई बैराग भई,फिर भी आस तुम्हारी थी।
छुआ चरण से शिला को ,रघुवरने तत्काल।
पग लगते ही बन गई वो ,गौतम नारी निहाल।

क्या पांव मैं तेरे जादु भरा है,पत्थर भी नर बन जाते है।
श्री राम दया के सागर है।

फिर एक वन में गिध्द पडा ,राम ही राम पुकारता था।
कटे हुए पंखो की पीडा से ,अपने प्राणो को हारता था।
सियाराम कहने लगे ,वो ही हुं मैं राम।
उठो गिध्दपति देखलो ये ,राम तुम्हे करे प्रणाम।
हट जाओ मुझे मरने दो।
माता का दिया राममंन्त्र का,आराधन मुझको करने दो।

खग जग का तु भेद ना जाने,समझे सबको बराबर है।
श्री राम दया के सागर है।

गिध्द राज के दुखो का ,करते हुए बखान।
जा पँहुचे सबरी के घर ,कृपा सिधु भगवान।
सुन्दर पत्तो के आसन पर ,अपने प्रभु को बैठाती है।
मेहमानी के खातिर कुछ ,डलिया बैरों की लाती है।
भिलनी का सच्चा भाव देख ,राघवजी भोग लगाते है।
उन बार बार झुट् बैरो का ,रूचि रूचि कर भोग लगाते।
ले लो लक्षमण तुम भी ले लो ,ये बैर सुधा से बढकर है।
सीता का दिया भोजन भी ,होता नहीं इतना रूचिकर है।
ये सुनकर भिलनी के हुआ आन्नद।
देवता भी बोलते जयति सच्चिदानन्द।

गद गद होकर भिलनी बोली,तुम ठाकुर हम चाकर है,
श्री राम दया के सागर है।

है रघुनन्दन सब दुख भंजन, रघुकुल कमल उजागर है।
श्रीं राम दया के सागर है।

desi hindi bhajan lyrics

भजन :- श्री राम दया के सागर है
गायक :- धर्मेश गावड़ी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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