सीता माता की गोदी में हनुमत डाली मुंदरी भजन लिरिक्स | sita mata ki godi mein bhajan lyrics

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सीता माता की गोदी में हनुमत डाली मुंदरी भजन लिरिक्स

सीता माता की गोदी में हनुमत डाली मुंदरी sita mata ki godi mein hanuman ji bhajan lyrics in hindi

 ।। दोहा ।।
लाल लंगोटा हथ बनिया ,मुख में नागर पान।
लंका में वानर चले ,श्री अंजनी सूत हनुमान।


~ हनुमत डाली मूंदड़ी ~

सीता माता की गोदी में,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


सुनकर जामवंत कि बात ,
हनुमंत मारी एक छलांग।
हिरदै ध्यान राम को राख।
सागर कूद पड़े हनुमान।
शीश पर राखी मुन्दडी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


लंका फिर फिर के सब जोई ,
खबर नहीं सिता की होई।
वहां बतलावे नाही कोई।
बजरंग जाए खड़े पनघट पे,
बातें कर रही सुन्दरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


बातें सुन सुन पतों लगायो,
बजरंग दौड़ बाग़ में आयो।
दर्शन सिता जी को पायो।
सिता झुरे विरह के माहि ,
बजरंग डाली मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।।


सिता देखत ही पहचानी ,
या श्री रघुवर की सेनाणी।
इसको कौन जानवर आणि।
वन में बहुत कल्पना करके,
कंठ लगाई मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।।


तब बोले हनुमत वाणी,
माता तू क्यों चिंता आणि।
रघुवर भेजी है सेंदानी।
मुझको भेज्यो श्री रघुवर,
जाय कर दे दो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


मैं तोही जानत नाही वीर,
मेरे लगी कालजे तीर।
मन में किस विध आवे धीर।
या तो नहीं राक्षसी माया,
छलकर लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


मैं हूँ रामचन्द्र को पायक,
मेरे राम है सदा सहायक।
उनको नाम अति सुखदायक।
मत कर सोच फिकर तू माता,
या नहीं छल की मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


सुनके देख सिया मुस्कानी,
मुख से बोली ऐसी वाणी।
तेरी छोटी सी जिंदगानी।
किस विध कूद गयो सागर,
यहाँ पर लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


माता छोटो सो मत जाण,
मैं हूँ बहुत बड़ो बलवान।
बल मोहि दीन्हो श्री भगवान।
रघुपति किरपा मोपे किन्ही,
तब मैं लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


सिता सुनकर ऐसी बात,
अपने मन में धीरज लाय।
इसको भेज्यो श्री रघुनाथ।
सिता बैठी बाग़ के माय,
पल पल निरखे मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


लंका फिर फिर के जलाई,
एक विभीषण को घर नाही।
बाकी सब घर आग लगाई।
जग को काज कियो हनुमान,
पूंछ बुझावे मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


हनुमत गए रघुवर के पास,
उनको खबर दई है खास।
मेट्यो सिता को सब त्रास।
तो सम नहीं कोई बलवान,
सराहे रघुवर मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


जो कोई ध्यान राम को लावे,
मुख से गुण रघुवर को गावे।
उनका जन्म मरण छुट जावे।
रघुवर पाप देय सब खोय,
जो कोई गावे मूंदड़ी।
सीता माता की गोदी में,
हनुमत डाली मूंदड़ी।


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hanuman ji bhajan lyrics in hindi

~ sita mata ki godi mein ~

sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


sunkar jamvant ki bat,
hanumat mari ek chhalang.
hirde dhyan ram ko rakh.
sagar kud pade hanuman,
shish par rakhi mundadi.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


lanka fir fir ke sab joi,
khabar nhi sita ki hoi.
vaha batlave nahi koi.
bajrang jaye khade pan ghat pe,
bae kar rahi sundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


bate sun sun pato lagayo,
bajrang dode bag me aayo.
darshan sita ji ko payo.
sita jhre virah ke mahi,
bajrang dali mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


sita dekhat hi pahchani,
ya shri raghuvar ki senani.
esko kon janavar aani.
van me bahut kalpan karke,
kanth lagai mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


tab bole hanumat vani,
mata tu kyu chinta aani.
raghuvar bheji hai sedani.
mujhko bhejo shri raghuvar,
jay kar de do mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


me toho janat nahi veer,
mere lagi kalje teer.
man me kis vidh aave dhir.
ya to nhi rakshshi maya,
chalkar layo mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


me hu ramchandra ko payak,
mere ram hai sada sahayak.
unko nam ati sukhdayak.
mat kar soch fikar tu mata,
ya nhi chal ki mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


sunke dekh siya muskani,
mukh se boli aisi vani.
teri choti si jindagani.
kis vidh kud gayo sagar,
yaha par layo mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


mata choto so mat jan,
me hu bahut bado balvan.
bal mohi dinho shri bhagwan.
raghupati kirpa mope kinhi,
tab me layo mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


sita sunkar aisi bat,
apne man me dhiraj lay.
esko bhejyo shri raghunath.
sita baithi bag ke maay,
pal pal nirkhe mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


lanka fir fir ke jalai,
ek vibhishan ko ghar nahi.
baki sab ghar aag lagai.
jag ko kaj kiyo hanuman,
punch bujhave mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


hanumat gaye raghuvar ke pas,
unko khabar di hai khas.
metyo sita ko sab tras.
to sam nhi koi balvan,
sarahe raghuvar mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


jo koi dhyan ram ko lave,
mukh se gun raghuvar ko gave.
unka janm maran chut jave.
raghuvar pap dey sab khoy,
jo koi gave mundari.
sita mata ki godi me ,
hanumat dali mundadi.


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सीता मुंदरी कथा

~ हनुमत डाली मुंदरी ~

सीता माता की गोदी में,हनुमत डाली मूंदड़ी।

सुनकर जामवंत कि बात ,हनुमंत मारी एक छलांग।
हिरदै ध्यान राम को राख।
सागर कूद पड़े हनुमान। शीश पर राखी मुन्दडी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।

लंका फिर फिर के सब जोई , खबर नहीं सिता की होई।
वहां बतलावे नाही कोई।
बजरंग जाए खड़े पनघट पे,बातें कर रही सुन्दरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।

बातें सुन सुन पतों लगायो,बजरंग दौड़ बाग़ में आयो।
दर्शन सिता जी को पायो।
सिता झुरे विरह के माहि ,बजरंग डाली मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

सिता देखत ही पहचानी ,या श्री रघुवर की सेनाणी।
इसको कौन जानवर आणि।
वन में बहुत कल्पना करके,कंठ लगाई मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

तब बोले हनुमत वाणी,माता तू क्यों चिंता आणि।
रघुवर भेजी है सेंदानी।
मुझको भेज्यो श्री रघुवर,जाय कर दे दो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।

मैं तोही जानत नाही वीर,मेरे लगी कालजे तीर।
मन में किस विध आवे धीर।
या तो नहीं राक्षसी माया,छलकर लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

मैं हूँ रामचन्द्र को पायक,मेरे राम है सदा सहायक।
उनको नाम अति सुखदायक।
मत कर सोच फिकर तू माता,या नहीं छल की मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।

सुनके देख सिया मुस्कानी,मुख से बोली ऐसी वाणी।
तेरी छोटी सी जिंदगानी।
किस विध कूद गयो सागर,यहाँ पर लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।

माता छोटो सो मत जाण,मैं हूँ बहुत बड़ो बलवान।
बल मोहि दीन्हो श्री भगवान।
रघुपति किरपा मोपे किन्ही,तब मैं लायो मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

सिता सुनकर ऐसी बात,अपने मन में धीरज लाय।
इसको भेज्यो श्री रघुनाथ।
सिता बैठी बाग़ के माय,पल पल निरखे मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

लंका फिर फिर के जलाई,एक विभीषण को घर नाही।
बाकी सब घर आग लगाई।
जग को काज कियो हनुमान,पूंछ बुझावे मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

हनुमत गए रघुवर के पास,उनको खबर दई है खास।
मेट्यो सिता को सब त्रास।
तो सम नहीं कोई बलवान,सराहे रघुवर मुंदरी।
सीता माता की गोदी मे,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

जो कोई ध्यान राम को लावे,मुख से गुण रघुवर को गावे।
उनका जन्म मरण छुट जावे।
रघुवर पाप देय सब खोय,जो कोई गावे मूंदड़ी।
सीता माता की गोदी में,हनुमत डाली मूंदड़ी।।

sunita swami ke bhajan lyrics

भजन :- हनुमत डाली मूंदड़ी
गायिका :- सुनीता स्वामी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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