घूंघट के पट खोल रे भजन लिरिक्स | ghunghat ke pat khol re bhajan lyrics

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घूंघट के पट खोल रे भजन लिरिक्स

घूंघट के पट खोल रे भजन, ghunghat ke pat khol re bhajan lyrics, kabir bhajan lyrics in hindi

 ।। दोहा ।।
पारख कीजे साध की ,और साध ही परखे कौन।
गगन मंडल में घर करे ,और अनहद रखे मोन।


~ घूँघट के पट खोल ~

घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


घट घट मै तेरे साईं बसत है,
कटुक बचन मत बोल रे ।
घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


धन जोबन का गरब ना कीजे,
झूठा इन का मोल ।
घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


जाग यतन से रंग महल में,
पिया पायो अनमोल ।
घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


सूने मंदिर, दिया जला के,
आसन से मत डोल ।
घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधों,
अनहद बाजत ढोल ।
घूँघट के पट खोल रे,
तोहे पिया मिलेंगे ।


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kabir bhajan lyrics in hindi

~ ghunghat ke pat khol ~

ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


ghat ghat me tere sai basat he,
katuk vachan mat bol re.
ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


dhan joban ka garab na kije,
jutha en ka mol.
ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


jag yatan se rang mahal me,
piya payo anmol.
ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


sune mandir diya jala ke,
aasan se mat dol.
ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


kahat kabir sono bhai sadho,
anhad bajat dhol.
ghunghat ke pat khol re,
tohe piya milenge.


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कबीर भजन संग्रह पुस्तक

~ घूंघट के पट खोल रे ~

घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

घट घट मै तेरे साईं बसत है,कटुक बचन मत बोल रे ।
घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

धन जोबन का गरब ना कीजे,झूठा इन का मोल ।
घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

जाग यतन से रंग महल में,पिया पायो अनमोल ।
घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

सूने मंदिर, दिया जला के,आसन से मत डोल ।
घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधों,अनहद बाजत ढोल ।
घूँघट के पट खोल रे,तोहे पिया मिलेंगे ।

prahlad tipaniya ke bhajan video

भजन :- घूंघट के पट खोल
गायक :- प्रहलाद टिपानिया
लेबल :- राजस्थानी भजन

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