नैया पड़ी मझधार हरि बिन कैसे लागे पार भजन लिरिक्स | meri naiya padi hai majhdhaar bhajan lyrics

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नैया पड़ी मझधार हरि बिन कैसे लागे पार भजन लिरिक्स

नैया पड़ी मझधार हरि बिन कैसे लागे पार भजन meri naiya padi hai majhdhaar bhajan lyrics in hindi

 ~ नैया पड़ी मंझधार ~

नैया पड़ी मंझधार ,
हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।


मैं अपराधी जनम जनम का,
मन में भरा विकार।
तुम दाता, दुःख भंजना ,
मेरी करो संभार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..


अवगुण दास कबीर के,
बहुत है गरीब नवाज।
जो मैं पूत कपूत हूँ,
कहौं पिता की लाज।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..


अन्तर्यामी एक तुम्ही हो,
जीवन के आधार।
जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी,
कौन उतारे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..


साहिब तुम मत भूलियो,
लाख लोग मिल जाये।
हम से तुम्हरे बहुत हैं,
तुम सो हमरो नाही।
गुरु बिन कैसे लागे पार।
नैया पड़ी …..


नैया पड़ी मंझधार,
हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।


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hindi bhajan lyrics in hindi

~ meri naiya padi majhdhaar ~

naiya padi majhdhar,
hari bin kaise lage paar.
guru bin kaise lage paar.


me apradhi janam janam ka,
man me bhara vikar.
tum data dukh bhajana,
meri karo sambhar.
guru bin kaise lage paar.
naiya padi…..


avgun das kabir ke,
bahut hai garib navaj.
jo me put kaput hu,
kaho pita ki laaj.
guru bin kaise lage paar.
naiya padi…..


antaryami ek tumhi ho,
jivan ke aadhar.
jo tum chhodo hath prabhu ji,
kon utare paar.
guru bin kaise lage paar.
naiya padi…..


sahib tum mat bhuliyo,
lakh log mil jaaye.
ham se tumhare bahut hai,
tum so hamro nahi.
guru bin kaise lage paar.
naiya padi…..


naiya padi majhdhar,
hari bin kaise lage paar.
guru bin kaise lage paar.


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हिंदी भजन संग्रह लिरिक्स

~ नैया पड़ी मझधार ~

नैया पड़ी मंझधार ,हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।

मैं अपराधी जनम जनम का,मन में भरा विकार।
तुम दाता, दुःख भंजना ,मेरी करो संभार।
गुरु बिन कैसे लागे पार। नैया पड़ी …..

अवगुण दास कबीर के,बहुत है गरीब नवाज।
जो मैं पूत कपूत हूँ,कहौं पिता की लाज॥
गुरु बिन कैसे लागे पार। नैया पड़ी …..

अन्तर्यामी एक तुम्ही हो,जीवन के आधार।
जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी,कौन उतारे पार॥
गुरु बिन कैसे लागे पार। नैया पड़ी …..

साहिब तुम मत भूलियो,लाख लोग मिल जाये
हम से तुम्हरे बहुत हैं,तुम सो हमरो नाही।
गुरु बिन कैसे लागे पार। नैया पड़ी …..

नैया पड़ी मंझधार,हरी बिन कैसे लागे पार।
गुरु बिन कैसे लागे पार।

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भजन :- नैया पड़ी मझधार
गायक :- श्याम सुंदर ठाकुर जी
लेबल :- राजस्थानी भजन

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