मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का भजन लिरिक्स | mukut sir mor ka bhajan lyrics

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मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का भजन लिरिक्स

मुकुट सिर मोर का मेरे चित चोर का भजन mukut sir mor ka krishna hindi bhajan lyrics

 ।। दोहा ।।
ब्रज की रज चंदन बनी, माटी बनी अबीर,
कृष्ण प्रेम रंग घोल के, लिपटे सब ब्रज वीर।


~ मुकुट सिर मोर का ~

मुकुट सिर मोर का,
मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के,
कटीले हैं कटार से।


आजा में भर लू तुझे ,
अपनी ही बाहो में।
आजा छिपालु तुझे ,
अपनी निगाहो में।
दीवानो ने विचार के ,
कहा ये पुकार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।


रास बिहारी नहीं ,
तुलना तुम्हारी।
तुमसा ना देखा कोई ,
पहले अगाडी ।
दीवानों ने विचार के,
कहा यह पुकार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।


प्रेम लजाये तेरी ,
बाकी अदाओ पर।
फूल गटाये तेरी ,
तिरछी निगाहो पर।
जमाने को विसार के ,
दीवाने गये हार के।
दो नैना सरकार के,
कटीले हैं कटार से।


मुकुट सिर मोर का,
मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के,
कटीले हैं कटार से।


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krishna hindi bhajan lyrics

~ mukut sir mor ka ~

mukut sir mor ka,
mere chit chor ka.
do naina ghanshyam ke,
katile hai katar se.


aaja me bhar lu tujhe,
apni hi baho me.
aaja chhipalu tujhe,
apni nigaho me.
dowano ne vichar ke,
kaha ye pukar ke.
do naina ghanshyam ke,
katile hai katar se.


ras bihari nhi,
tulna tumhari.
tumsa na dekha koi,
pahle agadi.
diwano ne vichar ke,
kaha yah pukar ke.
do naina ghanshyam ke,
katile hai katar se.


prem lajaye teri,
baki adao par.
ful gataye teri,
tirchhi nigaho par.
jamane ko visar ke ,
deewane gaye har ke,
do naina ghanshyam ke,
katile hai katar se.


mukut sir mor ka,
mere chit chor ka.
do naina ghanshyam ke,
katile hai katar se.


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~ मुकुट सिर मोर का ~

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के, कटीले हैं कटार से।

आजा में भर लू तुझे ,अपनी ही बाहो में।
आजा छिपालु तुझे ,अपनी निगाहो में।
दीवानो ने विचार के ,कहा ये पुकार के।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से।

रास बिहारी नहीं ,तुलना तुम्हारी।
तुमसा ना देखा कोई ,पहले अगाडी ।
दीवानों ने विचार के, कहा यह पुकार के।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से।

प्रेम लजाये तेरी ,बाकी अदाओ पर।
फूल गटाये तेरी ,तिरछी निगाहो पर।
जमाने को विसार के ,दीवाने गये हार के।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से।

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का ।
दो नैना घनश्याम के, कटीले हैं कटार से।

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भजन :- मुकुट सिर मोर का
गायक :- प्रेम मेहरा
लेबल :- राजस्थानी भजन

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