चल हंसा सतलोक हमारे भजन लिरिक्स | chal hansa satlok hamare bhajan lyrics

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चल हंसा सतलोक हमारे भजन लिरिक्स

चल हंसा सतलोक हमारे chal hansa satlok hamare bhajan संत कबीर दास का भजन

 ।। दोहा।।
तुलसी नर का क्या बड़ा ,समय बड़ा बलवान।
काबा लूटी गोपिया , वही अर्जुन वही बाण।


।। चल हंसा सतलोक हमारे ।।

चल हंसा सतलोक हमारे ,
छोडो यह संसारा हो।


यही संसार काल है राजा ,
करम को जाल पसारा हो।
चौदह खंड बसे जाके मुख ,
सब को करत अहारा हो।
चल हंसा ….


जारि बारी कोयला कर डारत ,
फिर फिर दे ओतारा हो।
ब्रह्मा विष्णु शिव तन धरी आये ,
और को को कौन बिचारा हो।
चल हंसा ….


सुर नर मुनि सब छल छल मारण ,
चौरासी में डारा हो।
मध्य आकाश आप जहा बैठे ,
ज्योति सबद उजियारा हो।
चल हंसा ….


सेत सरूप सबद जहा फुले ,
हंसा करत बिहारा हो।
कोटिन सुर चंद छिपी जहा ,
एक रोम उजियारा हो।
चल हंसा ….


वही पार एक नगर बसत है ,
बरसत अमृत धारा हो।
कहे कबीर सुनो धर्मदासा ,
लखो पुरुष दरबारा हो।
चल हंसा ….


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chal hansa satlok hamare bhajan English lyrics

!! sant kabir das bhajan !!

chal hansa satalok hamaare ,
chhodo yah sansaara ho.


yahee sansaar kaal hai raaja ,
karam ko jaal pasaara ho.
chaudah khand base jaake mukh ,
sab ko karat ahaara ho.
chal hansa ….


jaari baaree koyala kar daarat ,
phir phir de otaara ho.
brahma vishnu shiv tan dharee aaye ,
aur ko ko kaun bichaara ho.
chal hansa ….


sur nar muni sab chhal chhal maran ,
chauraasee mein daara ho.
madhy aakaash aap jaha baithe ,
jyoti sabad ujiyaara ho.
chal hansa ….


set saroop sabad jaha phule ,
hansa karat bihaara ho.
kotin sur chand chhipee jaha ,
ek rom ujiyaara ho.
chal hansa ….


vahee paar ek nagar basat hai ,
barasat amrt dhaara ho.
kahe kabeer suno dharmadaasa ,
lakho purush darabaara ho.
chal hansa ….


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संत कबीर दास का भजन Hindi lyrics

!! चल हंसा सतलोक हमारे !!

चल हंसा सतलोक हमारे ,छोडो यह संसारा हो।

यही संसार काल है राजा ,करम को जाल पसारा हो।
चौदह खंड बसे जाके मुख ,सब को करत अहारा हो।
चल हंसा ….

जारि बारी कोयला कर डारत ,फिर फिर दे ओतारा हो।
ब्रह्मा विष्णु शिव तन धरी आये ,और को को कौन बिचारा हो।
चल हंसा ….

सुर नर मुनि सब छल छल मारण ,चौरासी में डारा हो।
मध्य आकाश आप जहा बैठे ,ज्योति सबद उजियारा हो।
चल हंसा ….

सेत सरूप सबद जहा फुले ,हंसा करत बिहारा हो।
कोटिन सुर चंद छिपी जहा ,एक रोम उजियारा हो।
चल हंसा ….

वही पार एक नगर बसत है ,बरसत अमृत धारा हो।
कहे कबीर सुनो धर्मदासा ,लखो पुरुष दरबारा हो।
चल हंसा ….

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भजन :- चल हंसा सतलोक हमारे
गायक:- अनिल जांगड़ा
लेबल :- राजस्थानी भजन

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