सकल हंस में राम विराजे राम बिना कोई काम नहीं भजन | sakal hans mein ram biraje bhajan lyrics

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सकल हंस में राम विराजे राम बिना कोई काम नहीं भजन | sakal hans mein ram biraje bhajan lyrics

सकल हंस में राम विराजे राम बिना कोई काम नहीं भजन sakal hans mein ram biraje ram bina koi dham nahi प्रहलाद सिंह टिपानिया भजन

 ।। दोहा ।।
प्रेम ना बड़ी उपजे ,प्रेम ना हाट बिकाय।
बिना प्रेम का मानवा ,बंधिया जम पुर जाय।


।। सकल हंस में राम बिराजे ।।

सकल हंस में राम बिराजे ,
राम बिना कोई धाम नहीं।
सब भरमंड में जोत का बासा ,
राम को सिमरण दूजा नही।
सकल हंस ….


नाभि कमल से परख लेना ,
हृदय कमल बीच फिरे मणि।
अनहद बाजा बाजे शहर में ,
ब्रह्माण्ड पर आवाज हुयी।
सकल हंस ….


तीन गुण पर तेज हमारा ,
पांच तत्व पर जोत जले।
जिनका उजाला चौदह लोक में
सूरत डोर आकाश चढ़े।
सकल हंस ….


हीरा जो मोती लाल जवाहरत ,
प्रेम पदार्थ परखो यही।
सांचा मोती सुमर लेना ,
रामधनी से म्हारी दूर लगी।
सकल हंस ….


गुरुजन होय तो हेरीलो घट में ,
बाहर शहर में भटको मति।
गुरु प्रताप नानकशाह के चरने ,
भीतर बोले दूजा नहीं।
सकल हंस ….


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ram bina koi dham nahi bhajan English lyrics

!! sakal hans mein ram biraje !!

sakal hans mein raam biraaje ,
raam bina koee dhaam nahin.
sab bharamand me jot ka baasa ,
raam ko simaran dooja nahee.
sakal hans ….


naabhi kamal se parakh lena ,
hrday kamal beech phire mani.
anahad baja baje shahar mein ,
brahmaand par aavaaj huyee.
sakal hans ….


teen gun par tej hamaara ,
paanch tatv par jot jale.
jinaka ujala chaudah lok me 
soorat dor aakaash chadhe.
sakal hans ….


heera jo motee laal javaaharat ,
prem padaarth parakho yahee.
saancha motee sumar lena ,
ramadhani se mhari door lagi.
sakal hans ….


gurujan hoy to hereelo ghat mein ,
baahar shahar mein bhatako mati.
guru pratap nanakashah ke charane ,
bheetar bole dooja nahin.
sakal hans ….


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राम बिना कोई काम नहीं भजन lyrics in Hindi

!! सकल हंस में राम विराजे !!

सकल हंस में राम बिराजे ,राम बिना कोई धाम नहीं।
सब भरमंड में जोत का बासा ,राम को सिमरण दूजा नही।
सकल हंस ….

नाभि कमल से परख लेना ,हृदय कमल बीच फिरे मणि।
अनहद बाजा बाजे शहर में ,ब्रह्माण्ड पर आवाज हुयी।
सकल हंस ….

तीन गुण पर तेज हमारा ,पांच तत्व पर जोत जले।
जिनका उजाला चौदह लोक में सूरत डोर आकाश चढ़े।
सकल हंस ….

हीरा जो मोती लाल जवाहरत ,प्रेम पदार्थ परखो यही।
सांचा मोती सुमर लेना ,रामधनी से म्हारी दूर लगी।
सकल हंस ….

गुरुजन होय तो हेरीलो घट में ,बाहर शहर में भटको मति।
गुरु प्रताप नानकशाह के चरने ,भीतर बोले दूजा नहीं।
सकल हंस ….

प्रहलाद सिंह टिपानिया भजन video

भजन :- सकल हंस में राम बिराजे
गायक :- प्रहलाद सिंह टिपानिया
लेबल :- राजस्थानी भजन

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